द्रोणागिरी के ग्रामीण आज भी हनुमान जी की पूजा नहीं करते हैं। मान्यता है कि संजीवनी बूटी की खोज में आए हनुमान द्रोणागिरी पर्वत का एक बड़ा हिस्सा उखाड़ ले गए थे। इस पर्वत को ग्रामीण पर्वत देवता के रूप में पूजते थे। इसीलिए गांव के लोग हनुमान जी की पूजा नहीं करते हैं। आज भी द्रोणागिरी गांव में रामलीला का आयोजन होता है, लेकिन हनुमान जन्म से पहले ही रामलीला मंचन को समाप्त कर दिया जाता है। ग्रामीण उदय सिंह रावत का कहना है कि ग्रामीण आज भी रामभक्त हनुमान से खफा हैं। गांव में हनुमान की पूजा नहीं होती है।
द्रोणागिरी में बनेगा संजीवनी गार्डन
वर्ष 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में राज्य स्थापना दिवस के मौके पर पौराणिक द्रोणागिरी गांव में संजीवनी गार्डन विकसित करने की घोषणा की थी। उसी दौरान उन्होंने गार्डन को तैयार करने के लिए 15 लाख की धनराशि भी स्वीकृत की थी।