2013 में पुनर्नियुक्ति को लेकर आदेश जारी किए गए थे। इसके बावजूद भारी भरकम ढांचा होते हुए भी कई विभागों में पुनर्नियुक्ति की परंपरा बन गई है। कार्मिक की समस्या यह है कि कार्मिक एवं सतर्कता विभाग पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव को खारिज कर देता है तो संबंधित विभाग सीएम से अनुमोदन कराकर तैनाती दे रहे हैं। कई मामलों में तो चार या पांच या इससे भी अधिक कार्मिकों को इस तरह से पुनर्नियुक्ति दी जा रही है।
...तो न आती नौबत
मुख्य सचिव के मुताबिक विशेष दक्षता वाले कामों को करने के लिए समय रहते अगर अन्य कार्मिकों को तैयार कर लिया जाता तो पुनर्नियुक्ति की नौबत न आती। ऐसे में आदेश दिया गया है कि पुनर्नियुक्ति वाले अधिकारी छह माह के अंदर अन्य कार्मिकों को प्रशिक्षण देकर योग्य बनाएंगे।
सामान्य मामलों में भी दी जा रही है पुनर्नियुक्ति
हैरान करने वाली बात यह है कि विभागों में समूह ग और घ के पदों पर भी पुनर्नियुक्ति की जा रही है। इन पदों के लिए किसी विशेष तकनीकि ज्ञान या दक्षता की जरूरत नहीं होती है। मुख्य सचिव ने ऐसे मामलों के सामने आने पर गहरी नाराजगी जाहिर की है।
राज्य को हो रहा है दोहरा नुकसान
आदेश के मुताबिक पुनर्नियुक्ति के कारण राज्य को वित्तीय बोझ का सामना करना पड़ रहा है । इसके साथ ही संबंधित विभाग के योग्य अधिकारियों की क्षमता का पूरा उपयोग भी नहीं हो पा रहा है।