एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रावधानों में आईएफएस अधिकारियों के स्थानांतरण को लेकर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सिविल सर्विस बोर्ड गठित है। सिविल सर्विस बोर्ड की सिफारिश के आधार पर ही आईएफएस अधिकारियों के तबादले किए जाने चाहिए। यदि आईएफएस अधिकारियों का तबादले विशेष परिस्थितियों में दो साल से पहले किया जाते हैं तो सिविल सर्विस बोर्ड की ओर से संबंधित अधिकारी को नोटिस जारी किया जाता है। इसके बाद उनकी आपत्तियों को सुना जाता है। आपत्तियों के निपटारा के बाद ही संबंधित अधिकारी का तबादला किया जाता है, लेकिन फिलहाल में शासन की ओर से जिन आईएएस अधिकारियों के ट्रांसफर किए गए, उसमें सिविल सर्विस बोर्ड की कोई संस्कृति नहीं ली गई है। कई ऐसे अधिकारियों का तबादला कर दिया गया, जो दो साल की निर्धारित स्थानांतरण अवधि को भी पूरा नहीं कर पाए हैं।
चुनिंदा तबादले, निदेशक सीटीआर की कुर्सी बरकरार
तबादलों के बाद वन मुख्यालय के गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। चर्चाएं हैं कि पीसीसीएफ राजीव भरतरी और डीएफओ कालागढ़ किशनचंद को जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के अंदर हुई गड़बड़ी का खामियाजा भुगतना पड़ा। लेकिन पार्क के निदेशक की कुर्सी सलामत रही। जबकि वन विभाग के मुखिया को बीच में ही हटा दिया जाना, यह सामान्य फैसला नहीं था। बल्कि ऐसा पहली बार हुआ, जब किसी पीसीसीएफ (हॉफ) को समय से पहले हटा दिया गया।
कैडर पोस्ट पर केवल आईएफएस अधिकारी ही तैनात हो सकता है। नियमानुसार नॉन कैडर अधिकारियों को कैडर पोस्टिंग तभी दी जाती है, जब राज्य में आईएफएस अधिकारियों की कमी हो। वर्तमान में प्रदेश में पर्याप्त संख्या में आईएफएस अधिकारी मौजूद हैं। ऐसे में कैडर पोस्ट पर नॉन कैडर अधिकारियों का तबादला करना उचित नहीं है। हम इस मामले को मुख्यमंत्री के समझ उठाने जा रहे हैं।
- कपिल लाल, अध्यक्ष आईएफएस ऑफिसर्स एसोसिएशन