राजाजी टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों का दीदार करने के साथ ही सफारी करने वाले पर्यटकों को अब जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व की तर्ज पर ऑनलाइन बुकिंग करानी होगी। इसके लिए टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से एनआईसी के विशेषज्ञों की मदद से विशेष सॉफ्टवेयर तैयार करा लिया गया है। इसके लिए टाइगर रिजर्व के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित भी किया गया है।
टाइगर रिजर्व निदेशक डीके सिंह ने बताया कि वर्तमान में टाइगर रिजर्व आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को टाइगर रिजर्व के गेट पर ही आकर सफारी की बुकिंग के साथ ही अतिथिगृहों का आरक्षण कराना पड़ता है। ऐसे में पर्यटकों को तमाम दिक्कतें होती हैं। अब पर्यटकों को इस दिक्कत से निजात मिल जाएगी। राजाजी टाइगर रिजर्व आने वाले देशी-विदेशी पर्यटक अब अतिथि गृहों के साथ ही सफारी की ऑनलाइन बुकिंग करा सकेंगे। हालांकि पहले चरण में ऋषिकेश स्थित चौरासी कुटिया और सफारी की ही बुकिंग होगी। दूसरे चरण में अतिथिगृहों की बुकिंग होगी। बुकिंग की ऑनलाइन सुविधा से पर्यटकों को अतिथिगृहों और सफारी की बुकिंग के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
राजाजी टाइगर रिजर्व में रोपे जाएंगे फलदार पौधे
हरेला पर्व पर इस बार राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में फलदार पौधे लगाए जाने की तैयारी है। निदेशक डीके सिंह ने बताया कि टाइगर रिजर्व में फिलहाल फलदार वृक्षों की संख्या थोड़ी कम है। ऐसे में टाइगर रिजर्व क्षेत्र में हरेला पर्व पर फलदार पौधों को लगाने की तैयारी है। योजना को धरातल पर उतारा जा सके, इसके लिए वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों की भी मदद ली जा रही है।
कॉर्बेट पार्क में दिखा सफेद मोर
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के झिरना रेंज में मोरों के झुंड में वन कर्मियों को एक सफेद मोर दिखाई दिया। वहीं वनाधिकारी इसे अनुवांशिक परिवर्तन मान रहे है। कॉर्बेट प्रशासन ने वन कर्मियों को मोर की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
झिरना रेंज के कोठी रौ के आसपास जंगल में गश्त कर रही वन कर्मियों की टीम को सफेद मोर दिखाई दिया। वन कर्मियों ने मौके पर लगे कैमरा ट्रैप की जांच की तो उसमेें सफेद मोर की फोटो तो आई, लेकिन साफ नहीं थी। इसकी जानकारी वनाधिकारियों को दी गई। वनाधिकारियों ने सफेद मोर यानी अल्बिनो मोर के बारे में जानकारी ली। सफेद मोर अन्य मोरों के झुंडों के साथ था। इसके अलावा अन्य कोई सफेद मोर मौके पर नहीं था।