सरकार की महत्वाकांक्षी वन टाइम सेटलमेंट स्कीम (ओटीएस)-टू में अब तक 694 लोग कंपाउंडिंग के लिए आवेदन कर चुके हैं। इनमें से एक माह में सिर्फ 118 मामलों का ही निपटारा कर उन्हें कंपाउंड मैप जारी किया गया है। वहीं, नॉन कंपाउंडेबल होने के कारण 38 आवेदनों को रिजेक्ट कर दिया गया है।
प्रदेश में बिना नक्शा पास कराए बनाए गए भवनों की कंपाउंडिंग के लिए सरकार ने कुछ समय पहले ओटीएस-टू योजना की शुरूआत की। इसके तहत लोगों को कंपाउंडिंग में कई तरह की छूट देने का प्रावधान किया गया है। इसी का नतीजा है अब धीरे-धीरे योजना में आवेदनों की संख्या में इजाफा हो रहा है, लेकिन इनके निराकरण की प्रक्रिया अब भी काफी धीमी है।
एमडीडीए सचिव पीसी दुम्का ने बताया कि एक माह में 118 कंपाउंडिंग मैप जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि शुरूआत में योजना को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल और भ्रम थे। इसलिए उन्होंने आर्किटेक्ट और ड्राफ्ट्समैन के साथ चार वर्कशॉप कीं। इसके बाद अब मामलों में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि कुल 502 आवासीय और 192 व्यावसायिक आवेदन प्राप्त हुए हैं।
एप्लीकेशन अप्रूव होने पर जमा कराना होगा शुल्क
योजना के तहत आवेदन करते समय केवल सबमिशन फीस ही जमा करानी होगी। यह फीस 5001 रुपये तय की गई है। कंपाउंडिंग की एप्लीकेशन अप्रूव होने के बाद शुल्क जमा करानी होगी। इससे पहले ओटीएस-वन में यह प्रावधान नहीं था।
उसमें 50 फीसदी शुल्क पहले जमा कराने की व्यवस्था की गई थी। हालांकि सबमिशन फीस में बहुत अधिक बढ़ोत्तरी हुई है। पहले जहां प्लॉट साइज के अनुसार 215, 315 रुपये शुल्क था, वो अब बढ़ाकर 5001 रुपये कर दिया गया है।
सेट बैक, रोड के सबसे ज्यादा मामले
ओटीएस टू में सबसे ज्यादा लोगों ने सेट बैक, रोड के मामलों में छूट के आवेदन किए हैं। ज्यादातर लोगों ने आवासीय नक्शों में इसकी छूट मांगी गई है। जमीन का मिक्स यूज बढ़ा है। सरकार की ओर से अनुमति मिलने के बाद ज्यादातर लोग मकान के साथ छोटी दुकान और दफ्तर का नक्शा कंपाउंड करवा रहे हैं।