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उत्तराखंड: ओला-उबर की नो एंट्री मुसाफिरों की जेब पर पड़ रही भारी, तिगुना किराया मांग रहे ऑटो-टैक्सी में जाने को मजबूर

Mon, 27 Sep 2021 02:18 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

ओला-उबर की सुविधा का उपभोग करने के आदी हो चुके पर्यटक इन्हीं वाहनों में सफर करने के लिए मजबूर हैं। क्योंकि स्थानीय ऑटो-टैक्सी संचालक एयरपोर्ट, आईएसबीटी और देहरादून रेलवे स्टेशन के आसपास फटकने ही नहीं देते।
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ओला कैब - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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पर्यटन के लिए देवभूमि पहुंचने वाले देश-विदेश के पर्यटक हों या फिर शहर के ही बाशिंदे... एयरपोर्ट, आईएसबीटी और देहरादून रेलवे स्टेशन से बाहर कदम रखते ही स्थानीय ऑटो-टैक्सी चालकों की गिरफ्त में पहुंच जाते हैं। पर्यटन स्थल जाना हो या फिर अपने घर... किराया सामान्य से तिगुना ही मांगा जाता है।

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डेढ़ किलोमीटर दूर पैदल चलकर जाना पड़ता है
हील-हुज्जत के बाद दोगुने किराए पर डील फाइनल होती है जो सफर करने वाले की जेब पर बहुत भारी पड़ता है। ओला-उबर की सुविधा का उपभोग करने के आदी हो चुके पर्यटक इन्हीं वाहनों में सफर करने के लिए मजबूर हैं।क्योंकि मोबाइल फोन से बुक की जाने वाली कंपनियों के वाहनों को स्थानीय ऑटो-टैक्सी संचालक एयरपोर्ट, आईएसबीटी और देहरादून रेलवे स्टेशन के आसपास फटकने ही नहीं देते। यात्री अगर फिर भी चाहे तो उसे कम से कम डेढ़ किलोमीटर दूर पैदल चलकर जाना पड़ता है, लेकिन पर्यटन स्थलों से काफी पहले उन्हें उतरना पड़ता है, क्योंकि वहां भी ऐसे ही हालात हैं।
 
वैसे तो राजधानी दून में ओला, उबर कंपनियों से जुड़ी 2,000 से अधिक टैक्सियों का संचालन किया जा रहा है। शहर के किसी भी कोने से गाड़ियों की बुकिंग कराई जा सकती है। लेकिन, दूसरे राज्यों से देवभूमि आने वाले जो भी पर्यटक जौलीग्रांट एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या आईएसबीटी पहुंच रहे हैं। उन्हें ओला, उबर कंपनियों की गाड़ियां बुक करने के बावजूद मौके पर गाड़ियां नहीं मिल पा रही है।
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ओला, उबर कंपनियां पर्यटकों से गाड़ियों की बुकिंग तो कर रही हैं, लेकिन पर्यटकों को गाड़ियां पकड़ने के लिए टैक्सी संचालक जौलीग्रांट एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और आईएसबीटी से काफी दूर बुला रहे हैं। ऐसे में पर्यटकों को सामान और बच्चों के साथ काफी दूर जाकर गाड़ियां पकड़नी पड़ रही हैं। जिसके चलते पर्यटकों को भारी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं।

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एग्रीगेटर पॉलिसी के तहत पंजीकरण कराए बिना ही संचालन पर आरटीओ सख्त

ओला, उबर जैसी कंपनियों ने राज्य सरकार के साथ एक एग्रीगेटर पॉलिसी के तहत कोई समझौता नहीं किया है और न ही परिवहन विभाग को निर्धारित शुल्क जमा कराया है। ऐसे में ओला, उबर कंपनियों को राज्य में कहीं भी गाड़ियां संचालित करने का अधिकार नहीं है।

आरटीओ (प्रवर्तन) संदीप सैनी का कहना है कि एग्रीगेटर पॉलिसी के तहत पंजीकरण कराने व निर्धारित शुल्क जमा कराने को लेकर ओला और उबर कंपनियों को कई बार लिखा-पढ़ी की गई, लेकिन अभी तक कंपनियों ने इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की है। ऐसे में जल्द ही ओला, उबर से जुड़ी जो भी गाड़ियां संचालित की जा रही हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

ओला, उबर टैक्सी संचालक मांग रहे अनुमति 
ओला- उबर टैक्सी कंपनी से जुड़े टैक्सी संचालकों आशीष बाधवा, मेहंदी हसन, विक्की, साहिल चौहान, संजीव चौधरी का कहना है कि एग्रीगेटर पॉलिसी के तहत गाड़ियों का राज्य सरकार और परिवहन विभाग के साथ अनुबंध करने व टैक्स जमा कराने की जिम्मेदारी कंपनियों की है। ऐसे में कंपनी के स्तर पर कार्रवाई होनी चाहिए।

आईएसबीटी, जौलीग्रांट एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन पर जाने की अनुमति नहीं होने पर उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। साथ ही यात्रियों को भी दिक्कतेें हो रही हैं।  ऐसे में ओला, उबर से जुड़े टैक्सी संचालकों को आईएसबीटी, एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन परिसर में जाने की अनुमति दी जाए।
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