ओला, उबर जैसी कंपनियों ने राज्य सरकार के साथ एक एग्रीगेटर पॉलिसी के तहत कोई समझौता नहीं किया है और न ही परिवहन विभाग को निर्धारित शुल्क जमा कराया है। ऐसे में ओला, उबर कंपनियों को राज्य में कहीं भी गाड़ियां संचालित करने का अधिकार नहीं है।
आरटीओ (प्रवर्तन) संदीप सैनी का कहना है कि एग्रीगेटर पॉलिसी के तहत पंजीकरण कराने व निर्धारित शुल्क जमा कराने को लेकर ओला और उबर कंपनियों को कई बार लिखा-पढ़ी की गई, लेकिन अभी तक कंपनियों ने इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की है। ऐसे में जल्द ही ओला, उबर से जुड़ी जो भी गाड़ियां संचालित की जा रही हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ओला, उबर टैक्सी संचालक मांग रहे अनुमति
ओला- उबर टैक्सी कंपनी से जुड़े टैक्सी संचालकों आशीष बाधवा, मेहंदी हसन, विक्की, साहिल चौहान, संजीव चौधरी का कहना है कि एग्रीगेटर पॉलिसी के तहत गाड़ियों का राज्य सरकार और परिवहन विभाग के साथ अनुबंध करने व टैक्स जमा कराने की जिम्मेदारी कंपनियों की है। ऐसे में कंपनी के स्तर पर कार्रवाई होनी चाहिए।
आईएसबीटी, जौलीग्रांट एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन पर जाने की अनुमति नहीं होने पर उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। साथ ही यात्रियों को भी दिक्कतेें हो रही हैं। ऐसे में ओला, उबर से जुड़े टैक्सी संचालकों को आईएसबीटी, एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन परिसर में जाने की अनुमति दी जाए।