प्रदेश में 10 लाख एपीएल कार्ड धारकों के लिए सरकार ने राहत के रूप में हर कार्ड पर 20 किलो सस्ते राशन की घोषणा की, लेकिन इसका जीओ न होने से दिसंबर से मिलने वाले राशन के जनवरी 2022 में भी मिलने के कम आसार नजर आ रहे हैं। अब कुछ दिनों बाद चुनाव आचार संहिता लगने वाली है। जिससे सस्ते अनाज का मामला लटक सकता है। विभागीय मंत्री बंशीधर भगत के मुताबिक राशन न मिलने के कारणों का पता किया जाएगा।
प्रदेश में कोविड महामारी के बीच सरकार ने गरीबी रेखा से ऊपर (एपीएल) के 10 लाख पीले राशन कार्ड धारकों को राहत देते हुए साढ़े सात किलो के स्थान पर 20 किलो राशन दिए जाने की घोषणा की थी। सरकार की घोषणा के बाद कार्ड धारकों को मई, जून और जुलाई में दस किलो चावल और इतना ही गेहूं दिया गया। इसके बाद सरकार की ओर से एक बार फिर एपीएल परिवारों को राहत के लिए दिसंबर 2021 से मार्च 2022 तक प्रति कार्ड 20 किलो राशन दिए जाने की घोषणा हुई।
छह दिसंबर को सनातन धर्म इंटर कालेज रेसकोर्स में महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से आयोजित अपने आभार समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसकी घोषणा की, लेकिन मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद विभाग मामले में शासनादेश जारी करना भूल गया। यही वजह है कि दिसंबर 2021 से मिलने वाले राशन के अब जनवरी में भी मिलने के कम आसार नजर आ रहे हैं।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक मामले में शासनादेश न होने से एपीएल परिवारों के लिए खाद्यान्न का आवंटन नहीं हो पाया है। उधर राशन विक्रेताओं का कहना है कि राशन विक्रेता पूर्व की तय दरों पर जनवरी में मिलने वाले खाद्यान्न का उठान कर चुके हैं।
सीएम के घोषणा करते ही एपीएल परिवारों को 20 किलो राशन का शासनादेश हो जाना चाहिए था, लेकिन राशन विक्रेताओं को अब तक इस दर पर राशन नहीं मिला।
- जितेंद्र गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तराखंड सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद
पीले राशन कार्ड धारकों को 20 किलो राशन के मामले को दिखवाया जाएगा।
- भूपाल सिंह मनराल, सचिव खाद्यान्न
यदि किसी एपीएल परिवार को 20 किलो राशन नहीं मिला तो उसे इस मामले की मुझसे शिकायत करनी चाहिए थी, मैं इसे दिखवाऊंगा।
- बंशीधर भगत, मंत्री खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति