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उत्तराखंड: ऊर्जा निगमों के 10 संगठनों कर्मचारी सत्याग्रह पर बैठे, आज रात से शुरू होगी हड़ताल

Mon, 26 Jul 2021 03:32 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

सोमवार को ऊर्जा निगमों के 10 संगठनों के 3500 से अधिक कर्मचारी एक साथ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
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सत्याग्रह पर बैठे ऊर्जा निगमों के कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड में तीनों ऊर्जा निगमों के कर्मचारी सोमवार रात 12 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं। रविवार को उन्होंने जनता से अपील की है कि बत्ती गुल होने की स्थिति से निपटने के लिए पहले ही इंतजाम कर लें, क्योंकि कोई भी बिजली कर्मचारी काम नहीं करेगा।

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सोमवार को यूजेवीएनएल के मुख्यालय के बाहर ऊर्जा निगमों के कर्मचारी सत्याग्रह पर बैठ गए। इस दौरान ऑल इंडिया फेडरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने कहा कि बिजली के कर्मचारी रोशनी देने के लिए हैं वह अंधेरे को चीर कर रोशनी लाते हैं। हम रोशनी देने के लिए काम करते हैं। रोशनी देना हमारी फितरत है, लेकिन यह मत समझना कि हम जलने के लिए मजबूर हैं। आज जो संघर्ष हो रहा है इसमें कोई नई मांग नहीं है।

लगातार बारिश के बावजूद उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड मुख्यालय के बाहर तीनों ऊर्जा निगमों के कर्मचारी जमे हुए हैं। दोपहर बाद विशाल रैली निकाली जाएगी। सत्याग्रह के लिए प्रदेश भर से बिजली कर्मचारी पहुंचे हैं। जिस वजह से जीएमएस रोड जाम की स्थिति बनी रही। जगह-जगह खड़ी कर्मचारियों की गाड़ियों से यातायात बाधित हो रहा है।
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शैलेंद्र दुबे ने कहा कि उत्तराखंड के नेताओं और अफसरों की नीयत भी खराब है और नीति भी नहीं है। मैंने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है, उन्हें कहा है कि 40 साल से एसीपी की जो व्यवस्था चल रही थी, उसके लिए प्रभावी निर्देश जारी कीजिए। मेरा मकसद सिर्फ हंगामा खड़ा करना नहीं है, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।

इस दौरान उन्होंने शायराना अंदाज में कहा कि 'मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए', 'एक आंसू भी खतरा है हुकूमत के लिए] तुमने कभी देखा है आंखों का समंदर होना' सरकार इन कर्मचारियों के आंसू भी देखें। उत्तराखंड जनरल ओबीसी एंप्लाइज एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष दीपक जोशी और महासचिव वीरेंद्र गोसाई ने भी इस हड़ताल को समर्थन दिया है।

सोमवार को ऊर्जा निगमों के 10 संगठनों के 3500 से अधिक कर्मचारी एक साथ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इन संगठनों ने मिलकर विद्युत अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा बनाया हुआ है, जिसके संयोजक इंसारुल हक का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानेगी, वह आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। वहीं, ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे भी रविवार को देहरादून पहुंच गए।

उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र भेज कर चेताया है कि यदि उत्तराखंड के बिजली कर्मिकों का उत्पीड़न किया जाता है तो देश के 15 लाख बिजली कर्मी मूक दर्शक नहीं रहेंगे। उत्तराखंड के बिजली कर्मियों के समर्थन में यथा आवश्यक कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे। जिसकी पूरी जिम्मेदारी उत्तराखंड सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि ऊर्जा कर्मियों का आंदोलन पूर्णत: शांतिपूर्ण है। वह लगातार प्रबंधन और सरकार के सामने शांतिपूर्वक अपनी मांगें रख रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। इस दौरान हुई आम सभा में उपनल संविदा और सेल्फ हेल्प कार्मिकों के समान कार्य के लिए समान वेतन देने, विभिन्न भत्ते देने और अन्य 14 सूत्री मांगों को लेकर 26 जुलाई की रात 12 बजे से हड़ताल शुरू करने का संकल्प लिया गया।

किसी को प्रताड़ित किया तो जेल भरेंगे
मोर्चा ने यह निर्णय लिया है कि अगर ऊर्जा प्रबंधन व सरकार द्वारा किसी भी ऊर्जा कार्मिक को प्रताड़ित किया जाता है या उसका उत्पीड़न किया जाता है या गिरफ्तार करने की कोशिश की जाती है तो सभी ऊर्जा कर्मचारी सामूहिक रूप से जेल भरो आंदोलन शुरू कर देंगे। जिसकी पूर्ण और पूर्ण जिम्मेदारी ऊर्जा प्रबंधन व सरकार की होगी।

यह हैं मांगें

ऊर्जा निगम के कार्मिक पिछले चार सालों से एसीपी की पुरानी व्यवस्था तथा उपनल के माध्यम से कार्योजित कार्मिकों के नियमितीकरण एवं समान कार्य हेतु समान वेतन को लेकर लगातार सरकार से वार्ता कर रहे हैं। 22 दिसंबर 2017 को कार्मिकों के संगठनों तथा सरकार के बीच द्विपक्षीय समझौता हुआ परंतु आज तक उस समझौते पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। ऊर्जा निगम के कार्मिक इस बात से क्षुब्ध हैं कि सातवें वेतन आयोग में उनकी पुरानी चली आ रही 9-5-5 की एसीपी व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है, जो कि उन्हें उत्तर प्रदेश के समय से ही मिल रहीं थीं। यही नहीं पे मैट्रिक्स में भी काफी छेड़खानी की गई। संविदा कार्मिकों को समान कार्य समान वेतन के विषय में कोई कार्यवाही नहीं हुई। इसके अतिरिक्त ऊर्जा निगमों में इंसेंटिव एलाउंसेस का रिवीजन नहीं हुआ।

यह दस संगठन होंगे हड़ताल में शामिल
- उत्तराखंड ऊर्जा कामगार संगठन
- हाईड्रो इलेक्ट्रिक इंप्लाइज यूनियन
- उत्तराखंड पावर जूनियर इंजीनियर्स एसोसिएशन
- उत्तरांचल बिजली कर्मचारी संघ
- उत्तराखंड पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन
- विद्युत प्राविधिक कर्मचारी संघ
- विद्युत डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन
- ऊर्जा आरिक्षत वर्ग एसोसिएशन
- उत्तराखंड विद्युत संविदा कर्मचारी एसोसिएशन
- पावर लेखा संघ

यह है आंदोलन का कार्यक्रम
सभी ऊर्जा कर्मचारी सोमवार को सुबह दस बजे से यूजेवीएनएल मुख्यालय पर सत्याग्रह शुरू करेंगे। दोपहर तीन बजे तक सत्याग्रह करने के बाद तीन बजे से पांच बजे तक यूपीसीएल मुख्यालय पर विशाल रैली निकालेंगे। इसके बाद रात 12 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो जाएगी। इसके तहत जहां बिजलीघरों के कर्मचारी काम नहीं करेंगे तो दूसरी ओर पावर हाउस भी नहीं चलेंगे। वहीं, पिटकुल के कर्मचारी भी पावर ट्रांसमिशन का काम नहीं करेंगे।
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ऊर्जा कर्मचारियों को शासन ने वार्ता के लिए बुलाया

प्रदेश के तीनों ऊर्जा निगमों के कर्मचारियों की हड़ताल की घोषणा को लेकर सरकार भी गंभीर है। सोमवार को शासन स्तर पर निगम कर्मचारियों को वार्ता के लिए बुलाया गया है। वार्ता के बाद ही आंदोलन का आगे का रुख तय होगा। हालांकि निगम कर्मियों का कहना है कि वह झूठे आश्वासन नहीं ठोस कार्रवाई चाहते हैं।

अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक हड़ताल का ऐलान करने वाले संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों को उन्होंने सोमवार को दोपहर 12:30 बजे वार्ता के लिए बुलाया है। इस वार्ता में तीनों निगमों के आला अधिकारी भी शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की सभी मांगों पर चर्चा की जाएगी।

एमडी दीपक रावत ने किया ज्वाइन
यूपीसीएल और पिटकुल में नए एमडी दीपक रावत ने भी सोमवार को ज्वाइन कर लिया है। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक सोमवार दोपहर को होने वाली वार्ता में दीपक रावत भी बतौर एमडी शामिल होंगे।
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