उत्तराखंड में तीनों ऊर्जा निगमों के कर्मचारी सोमवार रात 12 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं। रविवार को उन्होंने जनता से अपील की है कि बत्ती गुल होने की स्थिति से निपटने के लिए पहले ही इंतजाम कर लें, क्योंकि कोई भी बिजली कर्मचारी काम नहीं करेगा।
सोमवार को यूजेवीएनएल के मुख्यालय के बाहर ऊर्जा निगमों के कर्मचारी सत्याग्रह पर बैठ गए। इस दौरान ऑल इंडिया फेडरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने कहा कि बिजली के कर्मचारी रोशनी देने के लिए हैं वह अंधेरे को चीर कर रोशनी लाते हैं। हम रोशनी देने के लिए काम करते हैं। रोशनी देना हमारी फितरत है, लेकिन यह मत समझना कि हम जलने के लिए मजबूर हैं। आज जो संघर्ष हो रहा है इसमें कोई नई मांग नहीं है।
लगातार बारिश के बावजूद उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड मुख्यालय के बाहर तीनों ऊर्जा निगमों के कर्मचारी जमे हुए हैं। दोपहर बाद विशाल रैली निकाली जाएगी। सत्याग्रह के लिए प्रदेश भर से बिजली कर्मचारी पहुंचे हैं। जिस वजह से जीएमएस रोड जाम की स्थिति बनी रही। जगह-जगह खड़ी कर्मचारियों की गाड़ियों से यातायात बाधित हो रहा है।
शैलेंद्र दुबे ने कहा कि उत्तराखंड के नेताओं और अफसरों की नीयत भी खराब है और नीति भी नहीं है। मैंने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है, उन्हें कहा है कि 40 साल से एसीपी की जो व्यवस्था चल रही थी, उसके लिए प्रभावी निर्देश जारी कीजिए। मेरा मकसद सिर्फ हंगामा खड़ा करना नहीं है, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
इस दौरान उन्होंने शायराना अंदाज में कहा कि 'मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए', 'एक आंसू भी खतरा है हुकूमत के लिए] तुमने कभी देखा है आंखों का समंदर होना' सरकार इन कर्मचारियों के आंसू भी देखें। उत्तराखंड जनरल ओबीसी एंप्लाइज एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष दीपक जोशी और महासचिव वीरेंद्र गोसाई ने भी इस हड़ताल को समर्थन दिया है।
सोमवार को ऊर्जा निगमों के 10 संगठनों के 3500 से अधिक कर्मचारी एक साथ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इन संगठनों ने मिलकर विद्युत अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा बनाया हुआ है, जिसके संयोजक इंसारुल हक का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानेगी, वह आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। वहीं, ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे भी रविवार को देहरादून पहुंच गए।
उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र भेज कर चेताया है कि यदि उत्तराखंड के बिजली कर्मिकों का उत्पीड़न किया जाता है तो देश के 15 लाख बिजली कर्मी मूक दर्शक नहीं रहेंगे। उत्तराखंड के बिजली कर्मियों के समर्थन में यथा आवश्यक कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे। जिसकी पूरी जिम्मेदारी उत्तराखंड सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि ऊर्जा कर्मियों का आंदोलन पूर्णत: शांतिपूर्ण है। वह लगातार प्रबंधन और सरकार के सामने शांतिपूर्वक अपनी मांगें रख रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। इस दौरान हुई आम सभा में उपनल संविदा और सेल्फ हेल्प कार्मिकों के समान कार्य के लिए समान वेतन देने, विभिन्न भत्ते देने और अन्य 14 सूत्री मांगों को लेकर 26 जुलाई की रात 12 बजे से हड़ताल शुरू करने का संकल्प लिया गया।
किसी को प्रताड़ित किया तो जेल भरेंगे
मोर्चा ने यह निर्णय लिया है कि अगर ऊर्जा प्रबंधन व सरकार द्वारा किसी भी ऊर्जा कार्मिक को प्रताड़ित किया जाता है या उसका उत्पीड़न किया जाता है या गिरफ्तार करने की कोशिश की जाती है तो सभी ऊर्जा कर्मचारी सामूहिक रूप से जेल भरो आंदोलन शुरू कर देंगे। जिसकी पूर्ण और पूर्ण जिम्मेदारी ऊर्जा प्रबंधन व सरकार की होगी।