शांतिकुंज के स्वर्ण जयंती वर्ष पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान परिवार समेत देव संस्कृति विश्वविद्यालय पहुंचे। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देव संस्कृति विश्वविद्यालय की शिक्षा जीवन बदलने का अभियान है।
मृत्युंजय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वह गायत्री परिवार के सदस्य के रूप में हरिद्वार आए हैं। उन्होंने कहा कि हम उस परंपरा से आते हैं, जहां हजारों वर्ष पहले ऋषियों-मुनियों के तप से भारत विश्व गुरु बना। उन्होंने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का प्रथम दर्शन आज भी याद है। उन्होंने कहा कि युग ऋषि की ओर से चलाए गए सप्त आंदोलन साधना, शिक्षा, पर्यावरण, स्वावलंबन, नारी जागरण, व्यसन मुक्ति एवं आदर्श ग्राम को मध्य प्रदेश शासन में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लागू किया।
इसका प्रत्यक्ष लाभ वहां के लोगों को मिल रहा है। शिवराज चौहान ने कहा कि विश्व का शाश्वत शांति की ओर मार्गदर्शन भारत करेगा, जिसमे अखिल विश्व गायत्री परिवार जैसे आधात्मिक-सामाजिक संस्थानों का महत्वपूर्ण योगदान होगा।
देसंविवि के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने मुख्यमंत्री चौहान का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति से युग ऋषि गुरुदेव के जीवन को सुनने को अवसर मिला है, जो स्वयं गुरुदेव के दिखाए रास्ते पर चलकर सामाजिक जीवन की उत्कृष्टता को हासिल किए। कुलपति एवं प्रतिकुलपति ने शिवराज सिंह चौहान को गायत्री स्मृति चिन्ह, गंगाजल एवं पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का साहित्य देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर कुलपति शरद पारधी, कुलसचिव बलदाऊदेवांगन मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चारधाम देवस्थानम बोर्ड के बाद अब भू-कानून पर भी राज्य हित में फैसला लिया जाएगा। इसके लिए सभी की बात सुनी जाएगी और राय ली जाएगी। सरकार का फैसला उत्तराखंड के हित में होगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बृहस्पतिवार को देव संस्कृत विश्वविद्यालय में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही। दोनों मुख्यमंत्रियों ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय परिसर स्थित शौर्य दीवार पर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया।
इसके बाद देव संस्कृति विश्वविद्यालय परिसर में मौलश्री के पौधे का रोपण किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं। जिनसे लगातार मार्गदर्शन मिलता रहा है। इस दौरान कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पंडया आदि मौजूद रहे।