पिछले ढाई दशकों में इस स्थान पर खासकर बरसात के दिनों में कई वाहनों के मलबे में दबने के साथ ही कई लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। करोड़ों खर्च होने पर भी इस समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा था।
दो साल में हो गया स्लाइड जोन का इलाज
वर्ष 2013 की भीषण आपदा में लामबगड़ स्लाइड जोन में हाईवे का नामोनिशां मिट गया। तब सड़क परिवहन मंत्रालय ने लामबगड़ भूस्खलन जोन के स्थाई ट्रीटमेंट की जिम्मेदारी एनएच-पीडब्ल्यूडी को दी।
एनएच से विदेशी कंपनी मैकाफेरी नामक कंपनी ने यह कार्य लिया। फॉरेस्ट क्लीयरेंस समेत तमाम अड़चनों की वजह से ट्रीटमेंट का यह काम धीमा था। सरकारी प्रवक्ता के मुताबिक, वर्ष 2017 में त्रिवेंद्र सरकार ने ये तमाम अड़चनें मिशन मोड में दूर कीं। महज दो वर्ष में अब यह ट्रीटमेंट पूरा हो चुका है।
हर साल बरसात के समय लामबगड़ भूस्खलन जोन पर भारी मलबा आने की वजह से यात्रा बाधित होती थी। कई-कई घंटे यात्रियों को मार्ग पर ही गुजारने पड़ते थे। लेकिन अब इस भूस्खलन जोन का स्थायी समाधान होने से यात्रियों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।