चंपावत विधानसभा सीट के उप चुनाव के लिए भाजपा पहले ही कमर कस चुकी है। रणनीति बनाने का दौर भी शुरू हो गया है लेकिन कांग्रेस आपसी झगड़े से ही पार नहीं पा रही है। कांग्रेस के लिए घर संभालना मुश्किल हो रहा है। लचर संगठन से भी ज्यादा चुनौती उसकी धड़ेबाजी बन रही है।
हाल इस कदर बिगड़े हैं कि महंगाई के विरोध में सोमवार को हुए पुतला दहन में भी गुटबाजी साफ दिखी। जिलाध्यक्ष की मौजूदगी में हुए विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के न तो विधायक मौजूद थे और न पूर्व विधायक।
चंपावत जिले में कांग्रेस का संगठन लचर है। चंपावत सीट से पार्टी लगातार दो चुनाव हार चुकी है। पिछले सप्ताह खटीमा के ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष बहादुर सिंह पाटनी कांग्रेस को छोड़ चुके हैं। अब पूर्णागिरि मंदिर समिति के कई पदाधिकारियों के भाजपा में शामिल होने की आहट है। कांग्रेस से कई नेता दल छोडने की लाइन में भी बताए गए है।
वहीं उपचुनाव की तैयारी में पिछड़ी कांग्रेस गुटबाजी में आगे हैं। उसकी गुटबाजी अब चौराहे पर है। 25 अप्रैल को चंपावत में महंगाई के विरोध में हुए प्रदर्शन में न तो विधायक और न पूर्व विधायक और न ही पार्टी का दूसरा धड़ा शामिल हुआ। वहीं जिलाध्यक्ष पूरन सिंह कठायत का कहना है कि विधायक खुशाल सिंह अधिकारी निजी कारणों से प्रदर्शन में नहीं पहुंच सके हैं। पार्टी उप चुनाव में पूरी ताकत से एकजुटता के साथ मैदान में उतरेगी