जागेश्वर धाम में आंवला (बरेली) से बीजेपी सांसद की ओर से गाली-गलौज प्रकरण ने राजनीतिक रंग ले लिया है। इस मामले में बीजेपी सांसद पर मुकदमा दर्ज हो चुका है, लेकिन कांग्रेस इतने भर से मुद्दे को छोड़ने को तैयार नहीं है। सोमवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश कांग्रेस चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष हरीश रावत ने इस मुद्दे को लेकर एक घंटे का उपवास रखकर विरोध दर्ज कराया।
सोमवार को ओल्ड मसूरी रोड स्थित आवास पर एक घंटे के उपवास के बाद हरीश रावत ने कहा कि जागेश्वर, भगवान जागनाथ का धाम जो एक साक्षात ज्योर्तिलिंग है, वहां के प्रधान पुजारी और लोगों के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर भाजपा के सांसद ने अपना अहंकार उडेला है। कहा कि भाजपा सरकार जागेश्वर में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव की परंपरा को बंद करके पहले ही अपनी छोटी सोच जाहिर कर चुकी है।
रावत ने कहा कि भाजपा सांसद का अमर्यादित व्यवहार अत्यधिक निंदनीय है। भाजपा को इस व्यवहार के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उपवास कार्यक्रम के दौरान प्रभु लाल बहुगुणा, गोदावरी थापली, राजेंद्र सिंह राणा, कमल सिंह रावत, उर्मिला थापा, संग्राम सिंह पुंडीर, श्याम सिंह चौहान, ललित जोशी, नीरज त्यागी, दीपेंद्र सिंह भंडारी, दिलबर प्रताप सिंह, मोहन काला, मनमोहन शर्मा, अल्का शर्मा, अमन उज्जैनवाल, कैलाश वाल्मीकि आदि मौजूद रहे।
देवभूमि का अपमान कर रहे भाजपा नेता : आप
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता कर्नल अजय कोठियाल (सेवानिवृत्त) ने कहा कि उत्तराखंड देव भूमि है। भाजपा नेता घमंड में देवभूमि का अपमान कर रहे हैं। इस मामले में भाजपा को तत्काल सांसद धर्मेंद्र कश्यप के लिए खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। कोठियाल ने कहा कि भाजपा धर्म की राजनीति करती है। भाजपा सांसद की ओर से जागेश्वर धाम में पुजारियों के साथ अभद्रता करने की घटना निदंनीय है। जागेश्वर मंदिर से लोगों की भावना जुड़ी है, लेकिन सत्ता धारी भाजपा के सांसद ने मंदिर में जाकर पुजारियों को धमका रहे हैं। जबकि मंदिर में जो भी व्यक्ति जाता है उसे आम श्रद्धालुओं की तरह दर्शन करने चाहिए। मंदिरों में हर तरह की घटना देवभूमि का अपमान है।
धार्मिक स्थलों पर सामान्य श्रद्धालुओं की तरह होना चाहिए व्यवहार : कौशिक
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने कहा कि धार्मिक स्थल पर जाकर किसी भी रूप में वहां के नियमों का पालन कर सहयोग करने की आवश्यकता है। कोई भी व्यक्ति किसी भी पद पर हो, जब धार्मिक स्थल पर जाते हैं तो एक सामान्य श्रद्धालु की तरह व्यवहार होना चाहिए।