पोस्ट में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की 2017 के विधानसभा चुनाव की हार की कसक भी उभर कर सामने आई। रावत ने लिखा कि कभी-कभी कुछ नाम बोझ बन जाते हैं। उन्होंने लिखा- 2017 में कुछ ऐसी ही स्याही से मेरा नाम लिखा गया जो कांग्रेस के ऊपर बोझ बन गया। मैं, कांग्रेस को पापार्जित धन की स्याही से लिखे गए नाम के बोझ से भी मुक्त कर देना चाहता हूं, संयुक्त नेतृत्व में भी ऐसे नाम का बोझ पार्टी पर बना रहेगा।
पूर्व मुख्यमंत्री के रुख से और गहरा गया विवाद
सोमवार को नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के सोशल मीडिया में चल रहे बयानों में कहा गया था कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह पार्टी के सेनापति हैं और सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा। प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव भी दो दिन पहले कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेसवार्ता में साफ कह गए थे कि पार्टी किसी को चेहरा घोषित नहीं करेगी। मंगलवार को रावत ने इसी विवाद को एक कदम आगे बढ़ा दिया।