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झटका : राज्यपाल ने उत्तराखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक लौटाया, बताया स्वायतत्ता के विपरीत

Sat, 19 Dec 2020 11:45 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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बेबी रानी मौर्य - फोटो : File Photo
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राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने उत्तराखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2020 (अंब्रैला बिल) कई आपत्तियों के साथ विधानसभा को लौटा दिया है। राजभवन ने बिल में कुछ प्रावधानों को राजकीय विश्वविद्यालयों की स्वायतत्ता के विपरीत महसूस किया है। साथ ही कुलपति के चयन में कुलाधिपति (राज्यपाल) के अधिकारों को कमतर करने पर भी प्रश्न किए हैं।

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उन्होंने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर पीएम नरेंद्र मोदी के उस संदेश का भी पत्र में उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता में सरकारी हस्तक्षेप न्यूनतम होना चाहिए। तीखी टिप्पणियों के साथ राजभवन से विधेयक को लौटाया जाना राज्य सरकार के लिए झटका माना जा रहा है।

बता दें कि पिछले विधानसभा सत्र में प्रदेश सरकार ने विधेयक को पारित कराकर राजभवन की मंजूरी के लिए भेजा था। लंबे समय तक राजभवन में विचाराधीन रहने के बाद विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू होने से ठीक दो दिन पहले राज्यपाल ने इसे पुनर्विचार के लिए वापस कर दिया। विधानसभा में पारित करने के बाद प्रदेश सरकार यह मानकर चल रही थी कि विधेयक राजभवन से पास होकर आ जाएगा।
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राजभवन के इस रुख से प्रदेश सरकार असहज है। राज्यपाल ने विधेयक को विश्वविद्यालयों की स्वायत्ता के विपरीत बताया है। सूत्रों के मुताबिक, राजभवन से पुनर्विचार के लिए लौटाए गए विधेयक के साथ राज्यपाल ने ढाई पन्ने की एक चिट्ठी भेजी है। इस चिट्ठी में विधेयक के प्रावधानों से संबंधित सात आपत्तियां हैं, जिनका समाधान करने को कहा गया है।

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पिछले सत्र में विधेयक लाई थी सरकार

प्रदेश सरकार पिछले सत्र में 23 सितंबर को राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2020 विधानसभा में लाई थी। विधेयक को सदन से पास कराकर राजभवन भेज दिया गया था। प्रदेश में संचालित सभी राज्य पोषित विश्वविद्यालयों को एक कानून के दायरे में लाने की मंशा से सरकार यह विधेयक लाई थी।

राजभवन से विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटाने की मुझे जानकारी नहीं है। यदि विधेयक लौटा है तो उसका परीक्षण कर उसे पुन: भेजा जाएगा। 
- मदन कौशिक, संसदीय कार्य एवं विधायी मंत्री

विधेयक के वापस होने की मेरे पास कोई जानकारी नहीं है। उच्च शिक्षा विभाग को अभी विधेयक प्राप्त नहीं हुआ है। यदि राज्यपाल ने विधेयक को लेकर कुछ सुझाव दिए हैं, तो उन पर विचार होगा और परीक्षण के बाद उन्हें विधिवत ढंग से भेजा जाएगा।
- डॉ. धनसिंह रावत, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री (स्वंत्र प्रभार)

सरकार को घेरने का विपक्ष को मिला मौका

उत्तराखंड राज्य विवि विधेयक 2020 के राजभवन से आपत्तियों के साथ पुनर्विचार के लिए लौटाए जाने से सरकार असहज है। उधर, ऐन विधानसभा सत्र से पहले विपक्ष को मुद्दा मिल गया है। अब विपक्ष इस मसले पर सरकार को घेर सकता है।

ये हैं राजभवन की सात आपत्तियां

1. विधेयक स्वायतत्ता की अवधारणा के विपरीत हो रहा प्रतीत
2. संबद्धता को लेकर उठाया प्रश्न
3. बिल एकरूपता की अवधारणा के विपरीत
4. राज्य की विधायिका केंद्र की विधायिका से ऊपर नहीं
5. कुलाधिपति को राज्य सरकार के अधीन कर दिया
6. विवि के उद्देश्यों व नई शिक्षा नीति के विपरीत
7. नई शिक्षा नीति में नए निकाय का प्रावधान
 
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