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उत्तराखंड : सरकार हाईकोर्ट में देगी रोडवेज को पुनर्जीवित करने का प्लान, आगामी कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा मामला

Mon, 28 Jun 2021 03:52 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

परिवहन निगम में कर्मचारियों को पांच माह से वेतन न देने के मामले में हाईकोर्ट में दो दिन पहले सुनवाई हुई।
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मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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लगातार घाटे से जूझ रहे परिवहन निगम की ओर से पांच माह से कर्मचारियों के वेतन न देने के मामले में हाईकोर्ट की सख्ती का असर दिखने लगा है। शासन अब निगम को घाटे से उबारने और कर्मचारियों को वेतन देने का एक्शन प्लान तैयार कर रहा है।

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परिवहन निगम में कर्मचारियों को पांच माह से वेतन न देने के मामले में हाईकोर्ट में दो दिन पहले सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के साथ बात कर रविवार या सोमवार को कैबिनेट की बैठक बुलाने को कहा। कोर्ट ने कहा कि बैठक में तय किया जाए कि रोडवेज कर्मचारियों को पिछले पांच माह का करीब 68 करोड़ रुपये वेतन कैसे दिया जा सकता है।

एक ऐसा प्रस्ताव पास करें, ताकि आने वाले समय में ऐसी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। अब मुख्य सचिव को 29 जून को हाईकोर्ट में जवाब देना है। लिहाजा, शासन स्तर से ऐसी कार्ययोजना बनाई जा रही है, जिससे निगमकर्मियों को समय पर वेतन भी मिलेगा और निगम की आय बढ़ने से घाटा भी कम हो जाएगा। रविवार को भी दिनभर अधिकारी इस योजना पर माथापच्ची करते नजर आए। 
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निगम स्तर से भी कर्मचारियों को वेतन जारी करने की कवायद तेज कर दी गई है। निगम ने सभी डिपो से निगम कर्मियों के वेतन बिल तलब कर लिए हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में कर्मचारियों को रुका हुआ वेतन मिल जाएगा।

हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत हम परिवहन निगम का रिवाइवल प्लान तैयार कर रहे हैं। मंगलवार को होने वाली सुनवाई के दौरान यह प्लान कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा। इसी आधार पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-डॉ. रंजीत सिन्हा, सचिव, परिवहन
 

18 साल में एक बार भी मुनाफे में नहीं गया परिवहन निगम
18 साल बीत गए, लेकिन एक बार भी परिवहन निगम मुनाफे में नहीं आ पाया। हां, साल दर साल निगम का घाटा बढ़ता ही जा रहा है। कोरोना ने इस घाटे को बढ़ाने में आग में घी का काम किया है। यूपी से अलग होकर अक्तूबर 2003 में परिवहन निगम अस्तित्व में आया था।

शुरुआत घाटे से हुई और यह लगातार बढ़ता ही चला गया। कोरोना काल में निगम को सर्वाधिक घाटा 161 करोड़ रुपये का हुआ। आज निगम 500 करोड़ से ऊपर के घाटे में है। न कर्मचारियों का वेतन देने के लिए पैसा है और न ही रिटायर हुए कर्मचारियों के देयकों का भुगतान करने में सक्षम है। निगम का हर माह कर्मचारियों के वेतन पर करीब 20 करोड़ का खर्च है। 

किस साल - कितना घाटा
वर्ष         -       घाटा
2003-2004- 10 करोड़
2004-05 -15 करोड़
2005-06 - 10 करोड़
2006-07 - 02करोड़
2007-08 - 31 लाख
2008-09 -14 करोड़
2009-10 - 11 करोड़
2010-11 - 28 करोड़
2011-12 -26 करोड़
2012-13 - 25 करोड़
2013-14 - 37 करोड़
2014-15 - 34 करोड़
2015-16 -10 करोड़
2016-17 - 19 करोड़
2017-18 - 23 करोड़
2018-19 - 44 करोड़
2019-20 - 47 करोड़
2020-21 - 161 करोड़

यूपी से एक हजार करोड़ से ऊपर लंबित
उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद करीब एक हजार करोड़ की परिसंपित्तयां उत्तराखंड परिवहन निगम को मिलनी हैं। लगातार यह मांग उठती रही है, लेकिन आज तक यह उत्तराखंड को नहीं मिल पाई हैं। अब मामला हाईकोर्ट में लंबित है।

यूपी की तर्ज पर नहीं, उत्तराखंड की तर्ज पर होगी रोडवेज
अभी तक यूपी के नियम ही उत्तराखंड रोडवेज में भी लागू हैं, जबकि बस संचालन, अकाउंटिंग समेत तमाम कामों को उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से देखने की जरूरत है। लिहाजा, परिवहन निगम के एमडी ने इसके लिए एक अध्ययन दल का गठन किया है। दल गठन का मुख्य उद्देश्य रोडवेज की आय बढ़ाने और खर्चे कम करने के लिए सुझाव देना है। इसके लिए क्या बदलाव किए जा सकते हैं, बिंदुवार इसकी रिपोर्ट देनी है। यूपी के समय की नियमावली के बारे डिटेल देनी है। यदि इसमें बदलाव की जरूरत है तो उसको लेकर सुझाव देने हैं। आय के स्रोत कैसे बढ़ाए जाएंगे इसके बारे में भी बताना है।

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