मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में अधिकारियों को निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित किया जाए कि पुनर्वासित परिवारों के लिए पुनर्वास क्षेत्र में बिजली, पानी एवं अन्य मूलभूत आवश्यकताओं की पर्याप्त व्यवस्था हो। जिन पुनर्वासित गांवों को सड़क से जोड़ा जाना है, उनकी सूची जल्द शासन को उपलब्ध कराई जाए।
पुनर्वासित गांवों में मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए व्यवस्था मनरेगा से कन्वरजेंस एवं जिलाधिकारी के नियंत्रणाधीन विभिन्न फंडों से की जाए। इसके बाद भी कोई परेशानी हो तो मामला शासन स्तर पर लाया जाए। मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से आठ जिलों के पुनर्वासित गांवों के लोगों से बात कर उनकी समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी समस्याओं का उचित हल निकालने का प्रयास किया जाएगा।
लगातार होता रहे गांवों का सर्वे
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा की दृष्टि से संवेदनशील गांवों का लगातार सर्वे किया जाए। सर्वे के बाद जिन गांवों एवं परिवारों को तत्काल पुनर्वासित करने की आवश्यकता है, उसकी सूची भी जल्द उपलब्ध कराई जाए।
वहीं चिपको आंदोलन की भूमि रैणी गांव का पुनर्वास अटक गया है। रैणी गांव के पुनर्वास के लिए तय की गई भूमि को लेकर सुभांई गांव के ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है। अब जिला आपदा प्रबंधन विभाग नीती घाटी में भूमि तलाश रहा है। विगत सात फरवरी को ऋषि गंगा में ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ के बाद रैणी गांव भू-धंसाव और भूस्खलन की चपेट में आ गया था। गांव के निचले हिस्से में कई मकान भूस्खलन की जद में आ गए थे।
गांव के 55 परिवारों का पुनर्वास किया जाना है। जिला प्रशासन ने गांव का भूगर्भीय सर्वेक्षण करवाया था। भूवैज्ञानिकों ने सुभांई गांव में पुनर्वास के लिए भूमि चिह्नित की थी, लेकिन सुभांई गांव के ग्रामीणों ने इस भूमि पर आपत्ति दर्ज की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह खेती की जमीन है। पूर्व में अन्य गांवों के परिवारों के पुनर्वास के लिए भी भूमि दी जा चुकी है। लिहाजा गांव की शेष भूमि को पुनर्वास के लिए नहीं दिया जा सकता।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने बताया कि रैणी गांव के पुनर्वास की प्रक्रिया जारी है। गांव के 55 परिवारों के पुनर्वास की सूची शासन को भेज दी गई है। नीती घाटी में अन्य जगहों पर गांव के पुनर्वास के लिए सर्वेक्षण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जनपद में अभी तक आपदा प्रभावित 15 गांवों के 279 परिवारों का पुनर्वास किया जा चुका है। घाट ब्लॉक के सरपाणी गांव के 25 और झलिया के दो परिवारों के पुनर्वास के लिए प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।
डर के साए में जी रहे ग्रामीण
ऋषि गंगा की बाढ़ के बाद से रैणी गांव के लोग आफत झेल रहे हैं। यह गांव ऋषि गंगा नदी के किनारे स्थित है। बारिश होने पर ऋषिगंगा का जलस्तर बढ़ जाता है, जिससे आपदा से डरे ग्रामीण रातभर सो नहीं पा रहे हैं। ग्रामीण संग्राम सिंह और पूरन सिंह का कहना है कि गांव में कई भवन भू-धंसाव से जर्जर हो चुके हैं। ग्रामीण भारी बारिश होने पर अपने घरों को छोड़कर जंगल में रात बिताने को मजबूर हैं।