विजिलेंस जांच के शिकंजे में फंसे डॉ. मृत्युंजय मिश्रा को शासन ने आयुर्वेद विवि कुलसचिव पद से हटा दिया है। उन्हें आयुष सचिव के पास संबद्ध कर दिया गया है। मिश्रा, विवि में एक माह का कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाए।
दरअसल, मृत्युुंजय मिश्रा को 28 दिसंबर को शासन ने आयुर्वेद विवि में बतौर कुलसचिव बहाल किया था। उन्होंने कुलपति से आनाकानी के बीच कार्यभार भी ग्रहण कर लिया था। इस बीच शासन ने उप कुलसचिव डॉ. राजेश अदाना को बनाया और फिर हाईकोर्ट में चल रहे वाद के चलते हटाना को हटा दिया। बावजूद इसके मृत्युंजय मिश्रा और कुलपति प्रो. सुनील जोशी के बीच लगातार तनातनी का माहौल था।
कुलपति प्रो. जोशी शासन को उन्हें हटाने के लिए पत्र भी भेज चुके थे। मंगलवार को मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधू ने आदेश जारी करते हुए मिश्रा को आयुर्वेद विवि के कुलसचिव पद से हटा दिया। मुख्य सचिव ने अपने आदेश में कहा है कि विवि में चल रहे प्रशासनिक गतिरोध को समाप्त करने और शासकीय कार्य को सुचारु करने के उद्देश्य से मिश्रा को कुलसचिव पद से हटाकर अग्रिम आदेशों तक सचिव आयुष के कार्यालय में संबद्ध किया जाता है।
उनकी जगह फिलहाल शासन ने गुरुकुल परिसर के निदेशक डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी को बतौर कार्यवाहक कुलसचिव जिम्मेदारी सौंपी है। 28 दिसंबर को कुलसचिव पद पर बहाल हुए मिश्रा इस पद पर एक माह भी पूरा नहीं कर पाए।