प्रचंड बहुमत वाली सरकार में काम करने वाला एक अधिकारी पूरे सिस्टम पर भारी पड़ गया है। जिस रुड़की नगर निगम से उन्हें हटाने के आदेश हुए, उसी निगम में शासन ने उन्हें दोबारा तैनाती दे दी है। अब शहरी विकास से जुड़े सभी अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
चंद्रकांत भट्ट ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
दरअसल, इस कहानी की शुरुआत हुई 20 जुलाई को प्रभारी सचिव विनोद कुमार सुमन के आदेश से। आदेश में उन्होंने नगर निगम रुड़की के अधिशासी अधिकारी एवं प्रभारी सहायक नगर आयुक्त चंद्रकांत भट्ट को शहरी विकास निदेशालय में अटैच करते हुए तत्काल ज्वाइनिंग को कहा। निदेशालय आने के बजाय चंद्रकांत भट्ट ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया। हाईकोर्ट ने दो अगस्त को इस याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद 16 अगस्त को शहरी विकास निदेशालय ने दोबारा चंद्रकांत भट्ट को तीन दिन के भीतर निदेशालय में आख्या देने के निर्देश दिए। इसके बाद भी वह ज्वाइन करने नहीं पहुंचे।
इसके बाद 24 अगस्त को शहरी विकास निदेशक ललित मोहन रयाल ने इसे निदेशालय व शासन के आदेश की अवहेलना, अनुशासनहीनता, दुराचरण मानते हुए चंद्रकांत भट्ट को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही उन्हें निलंबन अवधि में शहरी विकास निदेशालय में अटैच करने के आदेश जारी किए गए। उन्होंने इसकी जांच संयुक्त निदेशक शहरी विकास को सौंप दी। इसी दिन उन्हें आरोप पत्र भी जारी किया गया। बात यहीं खत्म नहीं हुई। चंद्रकांत भट्ट की जिद के आगे पूरे सिस्टम ने घुटने टेक दिए। इस बीच चंद्रकांत भट्ट ने अपने चिकत्सकीय परामर्श से जुड़े कुछ अभिलेख निदेशालय में प्रस्तुत किए, जिसकी जांच संयुक्त निदेशक कर रहे हैं।
13 अगस्त को शहरी विकास निदेशक ललित मोहन रयाल ने शासन और उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन मानते हुए तत्काल बहाल कर दिया। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शासन के आदेशों के तहत अग्रिम आदेश तक चंद्रकांत भट्ट निदेशालय से ही अटैच रहेंगे। अब प्रभारी सचिव विनोद कुमार सुमन ने एक आदेश जारी किया है। इसके तहत चंद्रकांत भट्ट की शहरी विकास निदेशालय से संबद्धता समाप्त करते हुए उन्हें दोबारा रुड़की नगर निगम में प्रभारी सहायक नगर आयुक्त के पद पर ही तैनात कर दिया गया है। यानी तीन माह के भीतर उन्हें अटैच करने वाले अधिकारी ने ही उन्हें वापस उसी जगह पर तैनाती के आदेश जारी किए।
जांच जारी तो दोबारा तैनाती कैसे
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब निलंबन होने पर संयुक्त निदेशक के स्तर पर अभी जांच जारी है तो उन्हें उसी जगह पर तैनाती कैसे दी गई है। आमतौर पर निलंबित अधिकारी को उस जगह से इसलिए दूसरी जगह अटैच किया जाता है ताकि जांच प्रभावित न हो। इस सवाल का जवाब देने को कोई अधिकारी तैयार नहीं है।