दस माह तक पदोन्नति के आदेेश को दबाए रखने के मामले में ऑडिट विभाग के चार कर्मियों पर गाज गिरी है। दो कार्मिक पौड़ी जिला लेखा परीक्षा अधिकारी कार्यालय और दो निदेशालय के कार्मिक हैं। इन चारों को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया गया है।
लेखा परीक्षा विभाग में एक अधिकारी की पदोन्नति के आदेश शासन की ओर से जारी किए गए थे। दस माह तक संबंधित अधिकारी को नई तैनाती का आदेश मिला ही नहीं।
आखिरकार उक्त अधिकारी ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो खुलासा हुआ कि पदोन्नति के साथ नए स्थान पर नियुक्ति का आदेश दस माह पूर्व जारी हो गया था। यह मामला मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत तक पहुंचा तो शासन ने इस मामले में जांच के आदेश दिए। निदेशालय स्तर से हुई जांच में पाया गया कि शासन के आदेश केे फाइलों में दबाकर रखा गया।
हड़ताल के प्रति जवाबदेही की मुहिम को मिला बल
कार्मिक एकता मंच के अध्यक्ष रमेश चंद्र पांडे का कहना है कि निलंबन की कार्रवाई से मंच की हड़ताल के प्रति जवाबदेही की मुहिम को बल मिला है। कार्मिक एकता मंच ने मुख्यमंत्री से कहा था कि कर्मचारियों की समस्याओं को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाता है और इससे कर्मचारी हड़ताल पर जाने के लिए विवश होते हैं। कार्मिक एकता मंच की मांग थी कि हड़ताल पर कर्मचारियों को जाने के लिए विवश करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को चिह्नित किया जाए और उनके खिलाफ कार्यवाही की जाए।
यह है मामला
सहायक लेखा परीक्षा अधिकारी बलबीर सिंह की पदोन्नति का आदेश 28 फरवरी 2028 को वित्त अनुभाग छह से जारी हुआ। यह आदेश बलबीर सिंह को अधिकृत रूप से मिला ही नहीं। जांच में सामने आया कि निदेशालय को यह आदेश पांच जून 2020 को मिला।
यह आदेश पंजीकृत डाक से पौड़ी इसी माह भेजा गया था। जांच में पाया गया कि पौड़ी जिला लेखा परीक्षा कार्यालय में यह आदेश उपलब्ध ही है। इसी को देखते हुए निदेशालय में कार्यरत वरिष्ठ सहायक और एक अधिकारी और पौड़ी जिला लेखा परीक्षा अधिकारी कार्यालय के दो लिपिक वर्गीय कार्मिकों को निलंबित किया गया।