पांचवें राज्य वित्त आयोग ने त्रिस्तरीय पंचायतों और शहरी निकायों की करों में हिस्सेदारी की सिफारिशें तैयार कर ली हैं। आयोग के अध्यक्ष इंदु कुमार पांडे 19 जुलाई को राज्यपाल बेबीरानी को सिफारिशों की रिपोर्ट सौंपेंगे। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह रिपोर्ट प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में आएगी और इसे विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा।
कोविड महामारी के कारण रिपोर्ट तैयार होने में देरी
पंचम वित्त आयोग को अपनी रिपोर्ट चार नवंबर 2020 को दे देनी चाहिए थी। लेकिन कोविड महामारी के कारण रिपोर्ट तैयार करने में आयोग को देरी हुई। कोविड के कारण आयोग को निकायों और पंचायतों के सुझाव समय पर प्राप्त करने में कठिनाई हुई।
बढ़ाना पड़ा आयोग का कार्यकाल
आयोग के गठन की अधिसूचना चार नवंबर 2019 को हुई थी। आयोग का एक साल का कार्यकाल निर्धारित था। लेकिन राज्य में कोरोना संक्रमण के कारण आयोग का कार्यकाल तीन बार बढ़ाना पड़ा। पहले नौ नवंबर को फिर 10 फरवरी को और उसके बाद 30 अप्रैल को आयोग का कार्यकाल बढ़ाया गया।
रिपोर्ट की प्रत्याशा में जारी हो चुकी है किस्त
पंचम राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट की सिफारिशों को पहली अप्रैल से लागू हो जाना चाहिए था। लेकिन रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकी। आयोग की सिफारिशों की प्रत्याशा में वित्त विभाग को शहरी निकायों और पंचायतों को धनराशि जारी करनी पड़ी। राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें 13 जिलों में आठ नगर निगमों, 41 नगर पालिकाओं और 41 नगर पंचायतों, 13 जिला पंचायतों, 93 क्षेत्र पंचायतों 7491 पर लागू होंगी।
ये सिफारिशें करता है आयोग
राज्य के करों में शहरी निकायों और त्रिस्तरीय पंचायतों की हिस्सेदारी तय करने के साथ ही आयोग उनकी वित्तीय स्थिति में सुधार, आय के संसाधन बढ़ाने के उपाय, सूचना प्रौद्योगिकी के युग में जनप्रतिनिधियों के प्रशिक्षण व अन्य सुधारों की सिफारिशें करता है।
आयोग ने अपनी सिफारिशें तैयार कर दी हैं। राजभवन से हमें समय मिल गया गया। आयोग 19 जुलाई को राज्यपाल को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।
- इंदु कुमार पांडे, अध्यक्ष, पंचम राज्य वित्त आयोग