वाडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में मणिकरण नामक स्थान पर एक ऐसा भूगर्भ गर्म जलस्रोत है जिसका तापमान 93 डिग्री सेंटीग्रेड है। वहीं यमुनोत्री उत्तराखंड के यमुनोत्री धाम में स्थित गर्म जलस्रोत का तापमान 81 डिग्री सेंटीग्रेड पाया गया है।
जो अपने आप में बहुत अधिक है। संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक इन गर्म जल स्रोतों के पानी में कुछ और अवयव मिलाकर इन के तापमान को 100 डिग्री से अधिक किया जा सकता है, गर्म जल से निकलने वाली भाप के जरिए टरबाइन को संचालित किया जाएगा।
वाडिया इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. कलाचंद साईं के मुताबिक फिलहाल योजना के पहले चरण में तपोवन में स्थित भूगर्भीय गर्म जलस्रोत पर पावर प्लांट लगाने की योजना बनाई गई है। उत्तराखंड में 40 ऐसे भूगर्भीय गर्म जलस्रोत चिह्नित किए गए हैं जहां जियोथर्मल एनर्जी पावर प्लांट लगाए जा सकते हैं। यदि तपोवन परियोजना सफल रहती है तो इन सभी भूगर्भीय जलस्रोतों पर पावर प्लांट लगाने की योजना पर काम किया जाएगा।
वाडिया इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. साईं के मुताबिक भविष्य में जियोथर्मल एनर्जी पर और अधिक वैज्ञानिक शोध किए जा सकें, इसके लिए सेंटर फॉर जिओ थर्मल रिसर्च स्थापित करने की योजना है। इसके अलावा जियो थर्मल ऑब्जर्वेटरी भी लगाने की योजना पर काम किया जाएगा। ताकि पृथ्वी की भूगर्भीय हलचल का भी अध्ययन किया जा सके।
उच्च हिमालई क्षेत्रों में स्थित भूगर्भीय गर्म जलस्रोतों से बिजली बनाने की परियोजना पर काम किया जा रहा है। योजना के पहले चरण में जोशीमठ के आगे तपोवन में पांच मेगावाट का प्लांट लगाने की तैयारी है। यदि परियोजना सफल रहती है तो आने वाले समय में कई अन्य भूगर्भीय गर्म जलस्रोतों पर पावर प्लांट लगाए जा सकते हैं।
- डॉ. कलाचंद साईं, निदेशक वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी