पिछले चार साल में अगस्त महीने तक हुई विभागों को दिए गए बजट का पूरा इस्तेमाल नहीं हो सका। जारी वित्तीय वर्ष में भी कुल बजट का 28.60 फीसदी ही मंजूर किया गया और उसमें से भी केवल 54.12 फीसदी खर्च हो पाया।
यह तस्वीर केवल एक वर्ष की नहीं है। केंद्र पोषित योजनाओं के बजट के खर्च में ढिलाई की यह कहानी पिछले चार साल से दोहराई जा रही है। चुनावी साल में सरकार केंद्र पोषित योजनाओं के जरिये विकास की रफ्तार बढ़ाना चाहती है। इसके लिए पिछले तीन सालों में सबसे अधिक 12861.23 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया। लेकिन बजट स्वीकृति धनराशि के मामले में बेशक तीन सालों में सबसे अधिक 3678.07 करोड़ हो, लेकिन प्रतिशत के मामले में यह सबसे कम 28.60 प्रतिशत रही।
पिछले वित्तीय वर्ष में खर्च की सबसे ज्यादा दर
पिछले चार सालों के दौरान अगस्त महीने तक कुल स्वीकृत बजट के सापेक्ष खर्च की सबसे अधिक दर रही। इस वित्तीय वर्ष में अगस्त माह तक कुल स्वीकृत बजट के सापेक्ष 56 प्रतिशत बजट का इस्तेमाल हुआ। वर्ष 2018-19 में अगस्त महीने तक बजट के सापेक्ष 33.55 प्रतिशत धनराशि जारी की गई। जारी धनराशि के सापेक्ष विभागों ने केवल 47.23 प्रतिशत ही खर्च किया। इसी तरह 2019-20 में माह अगस्त तक बजट के सापेक्ष 31.56 प्रतिशत धनराशि मंजूर हुई। लेकिन मंजूर धनराशि का 36.12 फीसदी ही खर्च हो सका।
वित्तीय वर्ष 2020-21 में कुल बजट के 36.96 प्रतिशत मंजूरी के सापेक्ष 55.99 फीसदी खर्च
केंद्र पोषित योजनाओं के बजट खर्च की हकीकत
वित्तीय वर्ष कुल बजट कुल मंजूरी कुल खर्च
2018-19 7549.94 2532.91 1196.38
2019-20 8084.41 2551.39 921.52
2020-21 7725.09 2855.54 1598.75
2021-22 12861.23 3678.07 1990.48
नोट: धनराशि करोड़ में(स्वीकृति खर्च का ब्योरा अगस्त माह तक)
आज मुख्य सचिव करेंगे समीक्षा
मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधू बुधवार को केंद्र पोषित योजनाओं की समीक्षा करेंगे। बैठक में 50 करोड़ से ऊपर के बजट प्रावधान वाले विभागों की समीक्षा होगी। सभी विभागीय सचिवों को तैयारी के साथ बैठक में आने को कहा गया है।