उत्तराखंड भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के विवादों का गुब्बारा भी नेतृत्व परिवर्तन के बाद फूटने लगा है। बोर्ड के ऑडिट से लेकर सभी जांचें अब पूरी हो चुकी हैं। मंत्री हरक का कहना है कि ऑडिट उन्होंने खुद कराया था और बाकी कोई आरोप नहीं है, जिसकी जांच की जाए।
दरअसल, कर्मकार बोर्ड में बोर्ड अध्यक्ष बदलने के बाद कई तरह के विवाद सामने आए थे। बोर्ड के सभी लेखा-जोखा का एजी ऑडिट कराया गया। यहां भर्ती 38 कर्मचारियों को नियमविरुद्ध बताते हुए बाहर कर दिया गया। बोर्ड की ओर से ईएसआई अस्पताल के लिए दिया गया लोन भी वापस ले लिया गया। वहीं, बोर्ड की जांच शासन स्तर पर बैठाई गई।
नेतृत्व परिवर्तन होने के बाद सभी विवादों के गुब्बारे की हवा निकलनी शुरू हो गई है। ऑडिट के कुछ आपत्तियों पर सुनवाई की प्रक्रिया लगभग संपन्न हो गई है। 38 कर्मचारियों की बहाली के आदेश मंत्री के स्तर से किए जा चुके हैं। बाकी कोई भी जांच अब गतिमान नहीं है। अमर उजाला से बातचीत में श्रम मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि वर्ष 2005 से बोर्ड का ऑडिट नहीं हुआ था। इसलिए उन्होंने अपने पूर्व कार्यकाल में ही ऑडिट शुरू कराया था। उन्होंने कहा कि बाकी किसी भी तरह की बोर्ड की जांच नहीं चल रही है।
आसान नहीं कर्मकार बोर्ड के 38 कर्मचारियों को उसी तिथि से सवेतन बहाली
कर्मकार बोर्ड से हटाए गए 38 कर्मचारियों को दोबारा पुरानी तिथि से सवेतन बहाल करने की राह आसान नहीं है। प्रदेश में लागू नो वर्क, नो पे के आदेश के बीच इसमें संवैधानिक अड़चन आ सकती है, जिस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हो पाया है।
दरअसल, श्रम मंत्री ने नेतृत्व परिवर्तन के बाद हाल ही में आदेश जारी किया था कि हटाए गए 38 कर्मचारियों को उसी तिथि से बहाल किया जाए। उन्हें वेतन भी दिया जाए। इस आदेश पर अब श्रम विभाग संवैधानिक नजरिए से देख रहा है। क्योंकि प्रदेश में नो वर्क-नो पे का आदेश लागू है। ऐसे में पूर्व में हटाए गए कर्मचारियों को पूर्व तिथि से ज्वाइनिंग तो दी जा सकती है लेकिन वेतन देने में अटकल आ सकती है। फिलहाल श्रम विभाग इस पर विचार कर रहा है।