नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कोटद्वार और दुगड्डा नगरों में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था एक साल बाद भी दुरुस्त नहीं होने के मामले में सुनवाई करते हुए उत्तराखंड सरकार को दो माह के भीतर ट्रंचिंग ग्राउंड से कूड़े के ढेरों का निस्तारण करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने तय समयावधि में कूड़ा निस्तारण के लिए मजदूरों की संख्या बढ़ाने के आदेश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रोहित डंडरियाल ने बताया कि शुक्रवार को एनजीटी में कोटद्वार के ट्रंचिंग ग्राउंड में कूड़ा निस्तारण मसले पर सुनवाई हुई। उत्तराखंड सरकार की ओर से शहरी विकास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने अब तक किए गए प्रयासों के साक्ष्य और शपथपत्र प्रस्तुत किए।
राज्य सरकार ने अपने साक्ष्य और शपथपत्र में कहा कि शहरी विकास विभाग की ओर से स्वच्छ भारत मिशन के तहत 13.69 करोड़ की डीपीआर 23 नवंबर, 2020 को केंद्र सरकार को स्वीकृति के लिए भेजी गई है। इसके अलावा सरकार की ओर से स्वच्छ भारत मिशन के तहत 60.87 लाख की एक और डीपीआर भेजी गई थी, जिसके तहत केंद्र सरकार ने 24 जून, 2020 को करीब 11.014 लाख की धनराशि आवंटित कर दी थी।
दुगड्डा में स्वच्छ भारत मिशन के तहत कूड़ा निस्तारण के लिए धनीराम बाजार के निकट 1 हेक्टेयर भूमि चयनित की गई है। दुगड्डा में लगेसी वेस्ट का ट्रीटमेंट चूनाधारा के समीप खोह नदी के किनारे किया जा रहा है।
कहा कि कोटद्वार में लगेसी वेस्ट के सेग्रीगेशन और निस्तारण के लिए बॉयो रेमीडेशन मशीन लगाई गई है, जिससे 30 मीट्रिक टन कूड़ा प्रतिदिन निस्तारित किया जा रहा है। अभी तक मशीन से 200 मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण किया जा चुका है, जबकि करीब 16 हजार 800 टन कूड़ा ट्रंचिंग ग्राउंड में डंप है।
लगेसी वेस्ट के निस्तारण के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से 50 लाख की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। दुगड्डा से लगेसी वेस्ट की छंटाई कर उसे कोटद्वार के ट्रंचिंग ग्राउंड में डंप किया जाता है। घर-घर से कूड़ा एकत्र करने के संबंध में प्रदेश सरकार ने कहा कि कोटद्वार नगर निगम के सभी 40 वार्डों में कूड़ा एकत्र किया जा रहा है। वर्तमान ट्रंचिंग ग्राउंड में 40 कंपोस्ट पिटों का निर्माण कराया गया है।