हरिराम ने अमर उजाला को बताया कि भीम एप उनके लिए बेहद काम का साबित हुआ। कोविड काल में उन्होंने अपनी सवारियों से पूरा भुगतान केवल भीम एप के माध्यम से ही प्राप्त किया। इससे वह हाथों से नोटों को छूने से बच गए। इसी प्रकार उन्होंने फास्टैैग को भी प्राथमिकता के तौर पर इस्तेमाल किया, जिससे समय और छूने के झंझट से मुक्ति मिली।
ड्राइवरों, सब्जी विक्रेताओं को सिखाया एप चलाना
हरिराम ने बताया कि अपने सर्किल के सभी सब्जी विक्रेताओं और टैक्सी चालकों को उन्होंने भीम एप का इस्तेमाल करना सिखाया। आज हरदोई से आकर दून में सब्जी बेचने या टैक्सी चलाने वाले तमाम लोग भीम एप से ही भुगतान प्राप्त कर रहे हैं। वह अभी तक खुद भी लाखों रुपये की ट्रांजेक्शन इस एप के माध्यम से कर चुके हैं।
डर नहीं लगता, क्योंकि जागरूक हूं
जब हमने हरिराम से सवाल पूछा कि उन्हें भीम एप से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करने में धोखाधड़ी का खतरा तो नहीं लगता। इस पर हरिराम ने बताया कि उन्हें बिल्कुल डर नहीं लगता, क्योंकि वह जागरूक हैं। वह जानते हैं कि किसी को ओटीपी नहीं बताना, पासवर्ड लंबा बनाना है और थोड़े-थोड़े समय में पासवर्ड बदलते रहना है।
पत्नी, बच्चे और गांववाले बेहद खुश
पीएम मोदी से बात करने के बाद हरिराम के पास बधाईयों का तांता लगा हुआ है। उनकी पत्नी प्रीति, बेटी काजल और बेटा राज बेहद खुश हैं। वहीं, खबर चलने के बाद से हरदोई में परिजनों से लेकर तमाम रिश्तेदारों के फोन आ रहे हैं।