दूरगामी नकारात्मक प्रभाव के चलते लिया फैसला
वित्त विभाग का यह भी मानना है कि प्रदेश में वर्ष 2002 से दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की नियुक्ति पर रोक है। श्रम विभाग के शासनादेश को आधार पर बनाकर कई न्यायालयों में न्यूनतम वेतन दिए जाने की याचिकाएं दायर की गईं हैं, जबकि यह राज्य के सीमित वित्तीय संसाधनों एवं राज्य के वित्तीय प्रबंधन के अनुरूप नहीं है। चतुर्थ श्रेणी के पदों पर आवश्यकतानुसार आउटसोर्स से मानदेय पर तैनाती होती है, इसलिए प्रशासनिक, विधिक व वित्तीय प्रावधानों तथा राज्य की राजकोषीय स्थिति पर इसके दूरगामी नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए कैबिनेट ने यह नीतिगत निर्णय लिया है।