गिद्ध की सभी प्रजाति सीटीआर
कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक साकेत बडोला कह हैं कि गिद्ध संकटाग्रस्त है पर इसकी करीब सभी प्रजातियां सीटीआर में हैं। इसके अलावा नौ प्रजाति व घोंसले मिले हैं, जो बताता है कि ये पक्षी यहां पर ब्रीडिंग कर रहे हैं। कई संकटाग्रस्त प्रजातियां यहां पन उनके लिए जगह सुरक्षित है। अभी अध्ययन के दौरा एक सर्वे हो चुका है। जल्द ही दूसरा सर्वे किया जाएगा। इसमें प्रजातियों का विवरण, उनकी संख्या, किसके घोंसले हैं ये डिटेल एकत्र की जाएगी।
ये प्रजातियां मिलीं:
जो सर्वे हुआ है, उसमें पांच संकटग्रस्त रेड हेडेड वल्चर, इंडियन स्पॉटेड ईगल, व्हाइट रम्प्ड वल्चर, इजिप्शियन वल्चर, इंडियन वल्चर मिला है। इसके अलावा लेसर फिश ईगल, इजिप्शियन वल्चर व्हाइट रम्पड वल्चर, क्रेस्टेड सर्पेट ईगल, चेंजेबल हॉक ईगल आदि के घोंसले मिले हैं। वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. शाह बिलाल कहते हैं कि गिद्ध के प्रवास स्थल के प्रभावित होने और पशुओं को दी जाने वाली दर्द निवारक दवा के कारण संख्या में काफी कमी आई थी। इसके बाद पिंजौर में ब्रीडिंग सेंटर तक खोला गया था। सीटीआर में शिकारी पक्षियों की संख्या और घोंसला मिलना बेहतर और संरक्षित वास स्थल होने का भी संकेत है।