स्कूल फीस मामले में बाल आयोग ने मुख्य शिक्षा अधिकारी देहरादून को जांच कर एक महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने कहा कि अभिभावकों की ओर से आयोग को शिकायत की गई है कि जब से यह शासनादेश हुआ है कि ऑनलाइन पढ़ाने वाले स्कूल ही ट्यूशन फीस ले सकेंगे तब से छोटे बड़े सभी स्कूल व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर बच्चों को किताबों की फोटो व यूट्यूब लिंक भेज रहे हैं।
ऐसे में जिनके एक से अधिक बच्चे हैं उनके सामने यह समस्या खड़ी हो गई है कि एक ही समय पर दोनों बच्चों की क्लास शुरू होने के कारण किसी एक बच्चे को पढ़ाई से वंचित होना पड़ रहा है। इसके अलावा डाटा बैंक व नेट की समस्या भी आए दिन खड़ी हो रही है। विभागों का यह भी कहना है कि छोटे बच्चे जब स्कूल जाकर स्कूल में बोर्ड में जो पढ़ाया जाता है उसे ठीक से समझ नहीं पाते, ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई कैसे समझेंगे।
अभिभावकों का यह भी कहना है कि कक्षा एक से छोटी क्लास के बच्चों से भी फीस लेने के लिए स्कूलों की ओर से उन्हें ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा प्राइवेट स्कूलों ने विभिन्न मदों में ली जाने वाली फीस को ही ट्यूशन फीस बना दिया है। जो फीस लेने के लिए अभिभावकों पर दबाव बना रहे हैं।
आरोप है कि स्कूलों की ओर से ट्यूशन फीस के बारे में पूछे जाने पर गोलमोल जवाब दिया जा रहा है। जबकि एक तय फीस जमा करने के लिए मैसेज भेजकर अभिभावकों पर दबाव बनाया जा रहा है। आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने कहा कि स्कूल ट्यूशन फीस में अन्य फीस जोड़कर अभिभावकों को इसे जमा करने के लिए दबाव बना रहे हैं, जो नियमों के विपरीत हैं।