मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने मेला नियंत्रण भवन सभागार में समीक्षा बैठक भी की। जिलाधिकारी सी रविशंकर ने मुख्यमंत्री को कोविड-19 और आपदा के क्षेत्र में होने वाले कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड से बचाव के लिए अधिक से अधिक टेस्टिंग और वैक्सीनेशन कराएं। वैक्सीनेशन को लेकर कहीं कोई भ्रम की स्थिति है तो जागरूकता अभियान चलाएं। तीरथ सिंह रावत ने सभी विभागों के अधिकारियों को मानसून में बाढ़ आदि आपदाओं के लिए अभी से तैयारी करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने आईटीसी की ग्रीन टेंपल योजना का भी शुभारंभ किया।
इस दौरान कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, राज्यमंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा मदन कौशिक, विधायक खटीमा पुष्कर धामी, सुरेश राठौर, आदेश चौहान, प्रदीप बत्रा, कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, देशराज कर्णवाल, अमीलाल वाल्मीकि, अम्बरीश गर्ग, एसएसपी सैंथिल अबुदई कृष्णराज एस, सीडीओ सौरभ गहरवाल, सीएमओ डॉ. एसके झा मौजूद रहे।
लाखों की योजनाओं का किया लोकार्पण
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने शुक्रवार को मेला नियंत्रण भवन (सीसीआर) में 970.74 लाख रुपये लागत की विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण किया। इसमें ग्रामीण निर्माण विभाग प्रखंड हरिद्वार द्वारा ईवीएम और वीवीपैट गोदाम का निर्माण (लागत रुपये 394.56 लाख), जिला योजना के अंतर्गत विकासखंड रुड़की में कार्यालय भवन का निर्माण कार्य (लागत रुपये 90.14 लाख), ग्रामीण सड़कें एवं ड्रेनेज विभाग के अंतर्गत ग्राम नागल से अबुलहसनपुर तक सड़क निर्माण कार्य (लागत रुपये 328.63 लाख), रमसा योजना के अंतर्गत राजकीय इंटर कॉलेज सिकंदरपुर भैंसवाल में तीन कक्षा कक्ष, एक बालक एवं दो बालिका शौचालय का निर्माण (लागत रुपये 69.39 लाख), रमसा योजना के अंतर्गत राजकीय इंटर कॉलेज शहीद एमएस गैंडीखाता में दो कक्षा कक्ष, बालक शौचालय एवं दो बालिका शौचालय का निर्माण (लागत रुपये 50.76 लाख) और रमसा योजना के अंतर्गत राजकीय इंटर कॉलेज सलेमपुर में दो कक्षा कक्ष का निर्माण (लागत रुपये 37.26 लाख) का लोकार्पण किया।
पहली लहर के समय राज्य में कोरोना से निपटने की तैयारियां नाकाफी थीं। महामारी के प्रभाव व प्रकोप को नियंत्रित करने के इंतजाम बेहद कम थे। हालांकि, बाद में सरकार ने युद्धस्तर पर कार्य करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया। दून विवि की लेक्चर सीरीज में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि मार्च में जब कोरोना का पहला मामला आया, उसके बाद अस्पतालों का निर्माण, ऑक्सीजन आपूर्ति, आईसीयू, वेंटिलेटर, पीपीई किट, सैनिटाइजर व दवा उत्पादन, एंबुलेंस समेत अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर काफी काम हुआ।
सरकार ने बीमारी से निपटने के लिए सभी तरह के प्रयास किए। इसका असर भी दिखा और एक समय कोरोना से होने वाली मृत्यु संख्या शून्य पर पहुंच गई। उन्होंने कहा कि हमारी लापरवाही के कारण दूसरी लहर तेजी से फैली। अब तीसरी लहर की बात हो रही है। उन्होंने कहा कि तीसरी लहर से निपटने में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका अहम होगी।
वन्य जीव संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस सत्य कुमार ने कहा कि हमें ऑनलाइन कार्यों को बढ़ावा देने वाली संस्कृति विकसित करनी होगी। इस दौरान डीएसडब्ल्यू प्रो. एचसी पुरोहित, प्रो. हर्ष डोभाल, स्वीडन में भारत के पूर्व राजदूत अशोक सज्जन हार, कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, प्रो. ओपीएस नेगी, केडी पुरोहित, डॉ. एसपी सती, प्रो. कुसुम अरुणाचलम, डॉ. ऋषिकेश, डॉ. मंगल सिंह मौजूद रहे।