बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से बच्चों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति, रोकथाम और पुनर्वास विषय पर आयोजित कार्यशाला में सीएम तीरथ ने कहा कि संस्कार ही बच्चों को नशे की बढ़ती प्रवृत्ति से बचा सकते हैं।
नई पीढ़ी में नशे की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। बच्चों को नशा सहित तमाम विकृतियों से बचाने के लिए उन्हें संस्कारवान बनाना होगा। संस्कारित बच्चे जीवन के किसी भी क्षेत्र में असफल नहीं होते। उन्होंने कहा कि नशामुक्ति को लेकर जमीनी स्तर पर जागरुकता अभियान चलाए जाने चाहिए।
बच्चे स्कूल से अधिक समय अपने घर पर बिताते हैं। लिहाजा बच्चों को संस्कारवान बनाने की जिम्मेदारी अभिभावकों की है। उन्हें बच्चों की गतिविधियों पर बराबर नजर बनाने की जरूरत है, ताकि उन्हें गलत दिशा में जाने से रोका जा सके।