प्रदेश सरकार क्या चाहती है
1. प्रदेश में बगैर मान्यता के कोई मदरसा संचालित न हो।
2. मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त हो।
3. मदरसों के संचालन में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही हो।
4. मदरसों के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग नहीं हो।
5. एनसीईआरटी व उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड का कोर्स लागू हो।
बहुत सारी जगहों पर मदरसों को लेकर तमाम तरह की बातें सामने आ रही हैं। इसलिए एक बार उनका सर्वे होना नितांत जरूरी है, जिससे सारी वस्तु स्थिति स्पष्ट हो जाए।
- पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
मदरसों का सर्वे कराना सरकार का अधिकार है। इनकी जांच में यह देखा जाएगा कि इन्हें जो पैसा दिया जा रहा है वह सही जगह लग रहा है या नहीं। कहीं ऐसा तो नहीं है कि बच्चे और मदरसे का नाम पंजीकृत है, लेकिन असल में मदरसा है ही नहीं। इन मदरसों में बच्चे क्या पढ़ रहे हैं यह भी देखा जाएगा।
- शादाब शम्स, चेयरमैन, उत्तराखंड वक्फ बोर्ड
जानना जरूरी, मदरसों में तालीम के नाम क्या परोसा जा रहा है: भाजपा
प्रदेश भाजपा ने कहा कि यह जानना बहुत जरूरी है कि राज्य में संचालित हो रहे मदरसों में तालीम के नाम पर क्या परोसा जा रहा है? पार्टी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मदरसों का सर्वे कराने के फैसले का समर्थन किया और इसे बेहतर पहल बताया।
पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी ने कहा कि मदरसा तालीम का केंद्र होना चाहिए, लेकिन यह पड़ताल जरूरी है की क्या सभी मदरसे शिक्षा के मिशन में पूरी कर्तव्य निष्ठा से लगे हैं। उनकी शैक्षिक, सामाजिक गतिविधियां क्या हैं। वे देश के भावी कर्णधारों को क्या परोस रहे है ?
चौहान ने कहा कि मुसलिम समुदाय की ओर से भी जागरूक नागरिक आवाज उठा रहे हैं। वे इस बात के पक्षधर हैं कि मदरसों में भी गुणवत्तापरक शिक्षा और अनुशासन की जरूरत है। कई बार असामाजिक या राह भटक रहे युवकों के बारे मे यह सोच उभरकर आती रही है कि वहां पर धार्मिक कट्टरपंथी के वातावरण को बढ़ावा दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि आज के व्यावसायिक दौर मे नए परिवेश मे ढलना ही होगा। महज अनुदान लेने और अन्य गतिविधियों मे लिप्त संस्थानों पर इससे रोक लग सकेगी। बेहतर कार्य करने वाले संस्थानों को प्रोत्साहित और शिक्षा के नाम पर गैर शैक्षिक और समाज विरोधी तथा देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।