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Uttarakhand: सीएम धामी का बड़ा बयान, यूपी की तर्ज पर अब उत्तराखंड में भी होगा सभी मदरसों का सर्वे

Tue, 13 Sep 2022 09:14 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

बता दें कि हाल ही में उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष बने शादाब शम्स ने वक्फ बोर्ड की संपत्तियों से अवैध निर्माण ढहाने की बात कही थी। साथ ही उन्होंने प्रदेश के गैर पंजीकृत मदरसों की यूपी की तर्ज पर जांच की मांग की थी, जिसके बाद सीएम ने भी उनकी बात का समर्थन किया है।
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सीएम पुष्कर सिंह धामी - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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उत्तरप्रदेश की योगी सरकार की तर्ज पर उत्तराखंड की धामी सरकार ने भी प्रदेश में संचालित मदरसों का सर्वे कराने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मदरसों के सर्वे को नितांत जरूरी बताया है।

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प्रदेश में मदरसा बोर्ड के तहत 419 मदरसे संचालित हो रहे हैं। इनमें से आधे से अधिक बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं। इनमें केवल 192 मदरसे वित्त पोषित हैं। जो केंद्र एवं राज्य सरकार से मदद ले रहे हैं। 103 मदरसों का संचालन वक्फ बोर्ड कर रहा है जबकि 500 से अधिक निजी मदरसों के संचालन की भी सूचना है।

प्रदेश सरकार को राज्य में संचालित हो रहे इन मदरसों के संबंध तमाम तरह की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। इन शिकायतों की सच्चाई का पता लगाने के लिए प्रदेश सरकार एक बार सभी मदरसों का सर्वे कराना चाह रही है। वहीं, समाज कल्याण मंत्री चंदनराम दास तो पहले ही सरकार की मदद से संचालित हो रहे मदरसों की जांच के निर्देश दे चुके हैं। लेकिन मुख्यमंत्री ने सभी मदरसों का सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं।
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समाज कल्याण मंत्री भी करा रहे हैं मदरसों की जांच 

समाज कल्याण मंत्री चंदन राम दास के मुताबिक सरकार के संज्ञान में आया है कि बिना मान्यता चल रहे मदरसों से पांचवीं पास करने के बाद इनसे निकलने वाले छात्र-छात्राओं को अगली कक्षा में एडमिशन नहीं मिल पा रहा है। इनमें पढ़ने वाले बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार की ओर से पहले चरण में सरकार से मदद ले रहे मदरसों को मान्यता लेने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। कुछ मदरसों ने शिक्षा विभाग से मान्यता ले भी ली है।

कोई राजनीतिक द्वेष भावना नहीं

समाज कल्याण मंत्री चंदनराम दास का कहना है कि मदरसों की जांच में कोई राजनीतिक द्वेष भावना नहीं है। यह सब छात्र हित में किया जा रहा है। 

सर्वे में ये पता लगाएगी प्रदेश सरकार

1. प्रदेश में कितने गैर मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हो रहे हैं।
2. मदरसों के संचालन के लिए कहां से वित्त पोषण हो रहा है।
3. किस जिले में कितने गैर मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं।
4. मदरसों में कितने बच्चे तालीम ले रहे हैं।
5. मदरसों में किस तरह की शिक्षा दी जा रही है।

प्रदेश सरकार क्या चाहती है

1. प्रदेश में बगैर मान्यता के कोई मदरसा संचालित न हो।
2. मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त हो।
3. मदरसों के संचालन में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही हो।
4. मदरसों के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग नहीं हो।
5. एनसीईआरटी व उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड का कोर्स लागू हो।

बहुत सारी जगहों पर मदरसों को लेकर तमाम तरह की बातें सामने आ रही हैं। इसलिए एक बार उनका सर्वे होना नितांत जरूरी है, जिससे सारी वस्तु स्थिति स्पष्ट हो जाए।
- पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

मदरसों का सर्वे कराना सरकार का अधिकार है। इनकी जांच में यह देखा जाएगा कि इन्हें जो पैसा दिया जा रहा है वह सही जगह लग रहा है या नहीं। कहीं ऐसा तो नहीं है कि बच्चे और मदरसे का नाम पंजीकृत है, लेकिन असल में मदरसा है ही नहीं। इन मदरसों में बच्चे क्या पढ़ रहे हैं यह भी देखा जाएगा।
- शादाब शम्स, चेयरमैन, उत्तराखंड वक्फ बोर्ड 
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जानना जरूरी, मदरसों में तालीम के नाम क्या परोसा जा रहा है: भाजपा

प्रदेश भाजपा ने कहा कि यह जानना बहुत जरूरी है कि राज्य में संचालित हो रहे मदरसों में तालीम के नाम पर क्या परोसा जा रहा है? पार्टी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मदरसों का सर्वे कराने के फैसले का समर्थन किया और इसे बेहतर पहल बताया।

पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी ने कहा कि मदरसा तालीम का केंद्र होना चाहिए, लेकिन यह पड़ताल जरूरी है की क्या सभी मदरसे शिक्षा के मिशन में पूरी कर्तव्य निष्ठा से लगे हैं। उनकी शैक्षिक, सामाजिक गतिविधियां क्या हैं। वे देश के भावी कर्णधारों को क्या परोस रहे है ? 

चौहान ने कहा कि मुसलिम समुदाय की ओर से भी जागरूक नागरिक आवाज उठा रहे हैं। वे इस बात के पक्षधर हैं कि मदरसों में भी गुणवत्तापरक शिक्षा और अनुशासन की जरूरत है। कई बार असामाजिक या राह भटक रहे युवकों के बारे मे यह सोच उभरकर आती रही है कि वहां पर धार्मिक कट्टरपंथी के वातावरण को बढ़ावा दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि आज के व्यावसायिक दौर मे नए परिवेश मे ढलना ही होगा। महज अनुदान लेने और अन्य गतिविधियों मे लिप्त संस्थानों पर इससे रोक लग सकेगी। बेहतर कार्य करने वाले संस्थानों को प्रोत्साहित और शिक्षा के नाम पर गैर शैक्षिक और समाज विरोधी तथा देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
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