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Exclusive Interview: राज्यपाल गुरमीत सिंह बोले- कोऑपरेटिव से कॉरपोरेट तक ले जाने होंगे हिमालयी उत्पाद

Tue, 13 Sep 2022 08:53 PM IST
अलका त्यागी दयाशंकर शुक्ल सागर, अमर उजाला, देहरादून

सार

लेफ्टिनेंट जनरल से उत्तराखंड के महामहिम बने गुरमीत सिंह को 15 सितंबर को पूरे एक साल हो जाएंगे। इस मौके पर अमर उजाला की उनसे लंबी बातचीत हुई।
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राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चार राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त कर चुके अवकाश प्राप्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद राष्ट्रवादी विचारों के कारण एकदम से मीडिया में चर्चा में आ गए। एक सुबह उनके पास पीएमओ से फोन आया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपसे मिलना चाहते हैं। जब प्रधानमंत्री ने उनके सामने उत्तराखंड का राज्यपाल बनने का प्रस्ताव रखा तो उन्हें लगा जैसे ये कोई सपना है।

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उन्होंने धीरे से अपनी हथेली की दो उंगलियों के बीच चिकोटी काटी और खुद से पूछा- "मैं ही क्यों?" उन्होंने वाहे गुरु को याद किया और सोचा कि ये देश के लाखों सैनिकों और सिखों का सम्मान है और उन्हें वाहे गुरु ने देश की सेवा करने के लिए चुना है। लेफ्टिनेंट जनरल से उत्तराखंड के महामहिम बने गुरमीत सिंह को 15 सितंबर को पूरे एक साल हो जाएंगे। इस मौके पर अमर उजाला की उनसे लंबी बातचीत हुई। पेश हैं इसके प्रमुख अंशः-

प्रश्न : आप फौजी रहे, आपको कई प्रतिष्ठित मेडल भी मिले। फिर आप उस पद तक कैसे पहुंचे जो आमतौर पर राजनीतिज्ञों के लिए आरक्षित माना जाता है?
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मैं राजनीति में बिल्कुल नहीं आया न मेरी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि थी। रिटायरमेंट के बाद मैंने खुद को चार आदेश दिए। एक, अगर मुझे देश से जुड़ना है तो मुझे हिंदी सीखनी होगी, क्योंकि हिंदी इस देश की आत्मा है। दो, देश की सुरक्षा के लिए मुझे आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस की तकनीक सीखनी है। तीसरा, मुझे देश की सेवा करनी है। चौथा आदेश था देश से जुड़ने के लिए मुझे मीडिया से जुड़ना होगा। पांच साल टीवी चैनलों को दिए। पुलवामा हमले के बाद मैंने क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म और सैनिकों की सुरक्षा की बात उठाई।

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प्रश्न : तो मीडिया ने आपको यहां पहुंचाया?
नहीं पता। एक दिन पीएमओ से फोन आया, मुझे लगा मीडिया में मेरे किसी बयान पर पीएमओ को कोई जानकारी चाहिए होगी। पर पीएम से बातचीत के बाद मेरा जीवन बदल गया, मैं उनके विजन व दूरदृष्टि का कायल हो गया।

प्रश्न : इसीलिए आपने कोऑपरेटिव से कॉरपोरेट तक की बात की?
मैंने गुजरात में सहकारी दुग्ध आंदोलन का गहराई से अध्ययन किया है। उत्तराखंड में हिमालयी उत्पादों के छोटे-छोटे कोऑपरेटिव खोलकर बड़े पैमाने पर काम किया जा सकता है। लेकिन, अब केवल कोऑपरेटिव फार्मिंग या सोसाइटी से काम नहीं चलेगा, जब तक हम इसे कॉरपोरेट कल्चर से नहीं जोड़ेंगे। मैंने बाबा रामदेव का प्लांट देखा। वे धोती-खड़ाऊं पहनते हैं पर उनका पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर एक कॉरपोरेट कंपनी जैसा है। यह प्रयोग छोटे पैमाने पर सही, ऊपर पहाड़ों पर करना है।

प्रश्न : उत्तराखंड से तो आपका बहुत पुराना नाता रहा है। आप 90 के दशक के अंतिम सालों में बनबसा में बतौर कर्नल तैनात थे?
हां, बनबसा की पोस्टिंग के दौरान मैंने उत्तराखंड को बहुत करीब से देखा। मुझे लगा यह राज्य तो प्राकृतिक संपदा की खान है, लेकिन तब मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन यहां के लोगों की इस तरह सेवा का मौका मिलेगा।

प्रश्न : आपको नहीं लगता कि हिमालय की प्राकृतिक संपदाओं का लाभ यहां के लोगों को नहीं मिल पा रहा है?
बिलकुल ऐसा ही है। यहां इस आधुनिक दौर में भी बहुत पुराने ढंग से काम चल रहा है। राजभवन के प्रांगण में दस हनी बॉक्स लगाए गए थे। एक महीने में उसमें 110 किलो शहद निकला। मैंने दस हनी बॉक्स फूलों की घाटी में लगवाए। वहां एक महीने में 330 किलो शहद निकाला गया। आप कल्पना कीजिए हिमालय की गोद में बसी फूलों की घाटी से निकले शहद की विश्व बाजार में क्या कीमत होगी? हमें खुद मालूम नहीं है कि प्रभु ने हमें क्या आशीर्वाद दिया है। मैं जब भी जिलों का दौरा करके लौटा मैंने विभाग के सचिव व निदेशक से इस संबंध में बातचीत की है कि लोगों के सामने जो चुनौती है उसमें कैसे मदद की जा सकती है। उत्तराखंड में नायाब जड़ीबूटियां हैं। उनकी ठीक तरह से मार्केटिंग हो तो यह राज्य भारत का ही नहीं बल्कि दुनिया के सम्पन्न राज्यों में एक होगा।

प्रश्न : उत्तराखंड सैनिक बहुल प्रदेश है। आप सैन्य पृष्ठभूमि से हैं। राज्य में पूर्व सैनिकों के मसलों के समाधान के लिए आपका क्या योगदान रहा है?
सच्चे दिल व आत्मा से जवाब दूं तो पूर्व सैनिक मेरे परिवार का हिस्सा हैं। किसी भी वीरांगना के लिए राजभवन के दरवाजे हमेशा खुले हैं। जो भी राष्ट्रीय सुरक्षा में काम करता है, चाहे वह किसी भी फोर्स से हो, मेरे लिए वह सैनिक है। उनके माता, पिता व बच्चों की कोई समस्या है तो उसके निपटारे के लिए मैंने राजभवन में अधिकारी की तैनाती की है। अब तक विभिन्न माध्यमों से मिली 600 में से 100 से ज्यादा शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है। इसमें कुछ भावुक कर देने वाली समस्याएं भी आई हैं।

प्रश्न : अग्निवीर भर्ती योजना को आप कैसे देखते हैं, यह कहा जा रहा है कि यह पेंशन बंद करने की योजना है ?
अग्निवीर जिस भी क्षेत्र में जाएंगे समाज में बड़ा बदलाव लाएंगे। सेना में उन्हें अनुशासन और राष्ट्र निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। सिपाही से लांस नायक बनने वाले जहां टीम लीडर की भूमिका में होंगे, वहीं अन्य समाज में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़कर बदलाव लाएंगे।

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प्रश्न : आपने जेएनयू के चीनी अध्ययन संस्थान में भारत-चीन सीमा मुद्दे पर दो साल अध्ययन किया। भारतीय व चीनी सैनिकों में आप क्या फर्क पाते हैं?
मैंने चीनी भाषा सीखी। मैं सात बार चीन गया हूं। युद्ध का असल अनुभव भारतीय सेना के पास है। एक बार जब मैं चीन गया तो वहां के जनरल ने बोला कि हमारे जवान कहते हैं बैरिक में एसी होना चाहिए, खाने के लिए विभिन्न चीजें चाहिए। जबकि हमारे भारतीय सैनिक कठिन परिस्थितियों में रहने के बवजूद सोचते हैं कि देश सेवा कैसे करें। ये फर्क है दोनों देश के सैनिकों में। चीन में एक संतान के नियम के कारण चीनी सैनिक नाजों में पले हैं। जबकि हमारे सैनिकों ने विपरीत परिस्थियों में जीवन जीया है। उनके लिए देश सबसे पहले है।

प्रश्न : आपको राज्यपाल के तौर पर एक साल होने जा रहा है। कैसा लग रहा है ?
मैं पूरे साल राज्य के हर जिले और सीमा क्षेत्र में घूमा हूं। यहां के लोगों का बहुत अधिक प्यार मिला। यहां आकर ऐसा लगता है कि मैं अपने परिवार में आ गया हूं। ऊपर पहाड़ों पर तैनात युवा आईएएस, आईपीएस और आईएफएस का स्टैंडर्ड बहुत अच्छा है। सबसे अधिक खुशी तब होती है जब स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से मिलता हूं। महिलाएं ऐसी शक्ति हैं जो यहां बदलाव ला सकती हैं। महिलाओं, बालिकाओं व युवाओं से मैं बहुत खुश हूं। पीएम ने केदारनाथ के प्रागंण से कहा था अगला दशक उत्तराखंड का होगा। इसमें कोई शक नहीं है।

प्रश्न : आप सीमावर्ती इलाकों में गए हैं। आपने देखा होगा उतराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में लोग पलायन कर रहे हैं। ये सुरक्षा की दृष्टि से भी ठीक नहीं है?
हां, इस सवाल पर संबंधित केन्द्रीय मंत्रियों से मेरी बात हुई। गडकरी जी ने बताया कि किस तरह वहां सड़कों का जाल बिछ रहा है। सूचना प्रौद्योगकी मंत्री ने वहां बेहतर नेटवर्क देने का भरोसा दिया है। गृहमंत्री जी स्थानीय लोगों की समस्याएं आसान करने पर काम कर रहे हैं। बेशक जल्द पहाड़ों के हालात बदलेंगे।

प्रश्न : विश्वविद्यालयों के लिए अंब्रैला एक्ट बनाने के लिए विधेयक राजभवन भेजा गया था वह दो साल से रुका है। कहा जा रहा है यह बिल बतौर कुलाधिपति राज्यपाल के अधिकारों को कम करता है?
अंब्रैला बिल पर विचार किया जा रहा है। पूर्व में इसे राजभवन से लौटाया गया था। इसके बाद इस मसले पर एक बार शिक्षा मंत्री व विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक हो चुकी है। नई शिक्षा नीति को देखते हुए भी इस पर विचार हो रहा है।

प्रश्न : कुलपतियों और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्तियों को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं?
यहां के विश्वविद्यालयों में मैंने तीन चीजों पर खास जोर दिया है- स्वायत्तता, जवाबदेही और पारदर्शिता। प्रदेश में 11 सरकारी विश्वविद्यालय हैं जिनमें कुलपतियों की नियुक्ति को पारदर्शी बनाने के लिए साक्षात्कार प्रक्रिया की वीडियो रिकार्डिंग की व्यवस्था की गई है। पैनल में शामिल सभी उम्मीदवारों से समान रूप से 10 सवाल पूछे जाते हैं।

प्रश्न : कुलपतियों के चयन में साक्षात्कार के दौरान जिस प्रक्रिया को अपनाया जा रहा है क्या उसे विवि अधिनियम में शामिल किया जाएगा ?
बेशक। इस संबंध में राजभवन की ओर से आदेश जारी किए गए हैं। शिक्षकों के इंटरव्यू में भी मैंने वीडियोग्राफी वाली व्यवस्था लागू करने के लिए कहा है। इसे जल्द विश्वविद्यालय अधिनियम में भी शामिल किया जाएगा। विश्वविद्यालय हो चाहे अन्य विभागों में होने वाली नियुक्तियां, सभी में पारदर्शिता बहुत जरूरी है। विवि में नियुक्तियों के लिए कुलपति जिम्मेदार हैं। नियुक्तियों में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए।

प्रश्न : राज्य के विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा अलग-अलग है?
विश्वविद्यालय कुलपतियों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा में एकरूपता होनी चाहिए। विवि के एक समान अधिनियम बनने पर यह संभव हो पाएगा।

प्रश्न : राजनीतिक मंच पर आपकी मौजूदगी को लेकर सवाल उठते रहे हैं?
मैं कोई भी निर्णय लेने से पहले राष्ट्र, समाज और जनहित के बारे में सोचता हूं। मैं सांविधानिकता, लोकतंत्र और राज्यपाल की गरिमा के सिद्धांत पर चलता हूं।

...जब भावुक हो गए कोविंद
तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दिसंबर 2021 में देहरादून आए थे। राजभवन आते वक्त रास्ते में उन्हें गढ़ी कैंट, छावनी परिषद में भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की एक छोटी सी मूर्ति दिखी। उन्होंने धीमे से आगे बैठे अपने एडीसी से कहा कि बाबा साहेब की यह मूर्ति कुछ ज्यादा ही छोटी नहीं है? राज्यपाल ने आंबेडकर की मूर्ति के जीर्णोद्धार के लिए सीईओ कैंट बोर्ड से अनुरोध किया था। बोर्ड ने वहां बाबा साहेब की पुरानी मूर्ति हटाकर छह फीट की बड़ी व भव्य मूर्ति लगा दी। राष्ट्रपति कोविंद जब राष्ट्रपति भवन से विदा हो रहे थे तो राज्यपाल ने उन्हें नई और पुरानी मूर्ति की तस्वीर दिखाई। ये देख राष्ट्रपति कोविंद भावुक हो गए।

गुंजी में बनेगा आर्मी स्कूल
राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश के सीमा क्षेत्रों के विकास के लिए वह गृह मंत्री और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री से मिले, जिसके बाद सीमा क्षेत्र में 25 से 40 जगहों पर पेयजल योजनाएं बनाई जाएंगी। जबकि पिथौरागढ़ के गुंजी में आर्मी स्कूल बनाया जाएगा।
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