इंसुलिन से इलाज संभव
डॉ. गौरव ने बताया कि बच्चों को दो तरह के इंसुलिन दिए जाते हैं। एक इसमें एक लॉन्ग एक्टिंग इंसुलिन होता है जो 18 घंटे तक असर करता है। वहीं, दूसरा इंसुलिन 15 से 20 मिनट में असर दिखाने लगता है और इनका असर तीन से चार घंटे तक रहता है।
बच्चा ज्यादा खाना खाएं तो खुश न हों
डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि शुरुआती दौर में टाइप 1 डायबिटीज की पहचान करना मुश्किल होता है। अगर बच्चा ज्यादा खाना खाता है तो घर वाले बहुत खुश होते हैं। जब वजन कम होता है तो इधर उधर उसका इलाज करवा करवाते हैं। टाइप 1 डायबिटीज को कई बार माता-पिता स्वीकार भी नहीं कर पाते हैं। ऐसे में माता पिता की काउंसिलिंग की जरूरत होती है।
वयस्कों में होती टाइप 2 डायबिटीज
डॉ. गौरव ने बताया कि वयस्कों में जो डायबिटीज होती है वह डायबिटीज टाइप 2 होती है। यह डायबिटीज भी जेनेटिक होती है। इसमें बेहतर डाइट, वजन कंट्रोल करने और फिजिकल एक्टिविटी करने से टाइप 2 डायबिटीज बिना दवा के भी कंट्रोल हो सकती है।
ये हैं लक्षण
- अधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना
- अचानक वजन कम होना, भूख बढ़ना
- थकान कमजोरी, चिड़चिड़ापन
टाइप 1 डायबिटीज के प्रमुख कारण
- जेनेटिक - जिन बच्चों के माता-पिता या भाई-बहन को टाइप 1 डायबिटीज है, इनमें जोखिम अधिक होता है।
- ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया - शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपने ही पैंक्रियास की बीटा कोशिकाओं पर हमला कर देती है।
- पर्यावरणीय कारक - कुछ वायरस का संक्रमण इस बीमारी के विकास में भूमिका निभा सकता है।
- बच्चों में शुरुआती जीवन में होने वाले वायरल संक्रमण इस बीमारी का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
- विटामिन डी की कमी
उपचार के मुख्य उपाय
- इंसुलिन इंजेक्शन या इंसुलिन पंप के माध्यम से शरीर में इंसुलिन की पूर्ति करना
- ब्लड शुगर की नियमित निगरानी
- ब्लड शुगर स्तर को दिन में कई बार मापना जरूरी
- ग्लूकोमीटर या निरंतर ग्लूकोज मॉनिटरिंग उपकरण का उपयोग करना
- कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा का संतुलित सेवन।
- नियमित शारीरिक गतिविधि ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करती है।
- नियमित रूप से डॉक्टर से परामर्श और जांच कराना।