कोरोनाकाल में कैदियों और बंदियों को छोड़ना हल्द्वानी जेल प्रशासन के लिए मुसीबत बन गया है। जेल प्रशासन को 35 कैदियों और 183 विचाराधीन बंदियों के आने का इंतजार है। इसकी पुष्टि वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्य ने की है।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक आर्य ने बताया कि पेरोल पर छोड़े गए 36 बंदियों को गिरफ्तार करने के लिए पांच जिलों के पुलिस अधीक्षकों को पत्र भेजा था। उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजने का अनुरोध किया गया था। इस मामले में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
वहीं, चेतावनी के बाद एक विचाराधीन बंदी और एक सजायाफ्ता कैदी वापस लौटा है। उन्होंने कहा कि विचाराधीन 183 बंदियों के मामले में अब अदालत निर्णय करेगी। कोरोना महामारी के कारण शासन के निर्देश पर हल्द्वानी जेल से 78 कैदी छह माह की पेरोल पर छोड़े गए थे। कोरोनाकाल में अलग-अलग कारणों से दस कैदी सजा से मुक्त हो गए।
32 सजायाफ्ता कैदी जेल में लौटकर आ गए, जबकि 35 कैदी समयावधि पूरी होने के बाद नहीं पहुंचे हैं। वरिष्ठ जेल अधीक्षक मनोज आर्या ने बताया कि लौटकर नहीं आने वालों में सबसे अधिक 27 ऊधमसिंह नगर और चार मुरादाबाद के बंदी हैं।
इसी प्रकार अदालत ने 210 विचाराधीन बंदियों को छह माह की अंतरिम जमानत पर छोड़ा था। इनमें 26 विचाराधीन बंदी अन्य मामलों में गिरफ्तार होने पर जेल लौटे हैं। 183 विचाराधीन बंदी वापस लौटकर नहीं आए हैं।