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कैग रिपोर्ट : यूपीसीएल ने उपभोक्ताओं को नहीं दी सेवाएं, करोड़ों का हुआ नुकसान

Sun, 07 Mar 2021 11:19 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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रुपये - फोटो : pixabay
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ऊर्जा के क्षेत्र से जुड़े दो निगमों यूपीसीएल और पिटकुल की भारी लापरवाही नुकसान का सबब बनी है। कैग की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। एक ओर यूपीसीएल को लेटलतीफी की वजह से करोड़ों रुपये का अर्थदंड भरना पड़ा है तो दूसरी ओर पिटकुल ने सरकार के नियमों के हिसाब से लेबर सेस न वसूलकर राजस्व का नुकसान किया है। 

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30 दिन के भीतर जारी नहीं किए बिजली कनेक्शन, लगा 18 करोड़ का फटका

नियामक आयोग के नियमों के हिसाब से उपभोक्ता को आवेदन करने के 30 दिन के भीतर बिजली कनेक्शन देना होता है लेकिन इस नियम में यूपीसीएल की लापरवाही की वजह से 18 करोड़ 82 लाख रुपये का जुर्माना लगा।
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वर्ष 2016-17 से 2018-19 के बीच कुल एक लाख 53 हजार 995 बिजली कनेक्शन दिए गए, जिनमें से पांच हजार 91 कनेक्शन ऐसे थे जो कि निर्धारित 30 दिन के बाद दिए गए।

इनमें से भी 2554 कनेक्शन एक से 30 दिन विलंब से, 1354 कनेक्शन 31 से 90 दिन विलंब से, 746 कनेक्शन 91 से 160 दिन विलंब से, 325 कनेक्शन 181 से 365 दिन और 112 ऐसे कनेक्शन थे जो कि एक साल से भी ज्यादा विलंब के बाद दिए गए। अप्रैल 2019 में यूपीसीएल पर 18 करोड़ 82 लाख रुपये का जुर्माना लगा। 

मीटरों को लेकर लापरवाही से भी करोड़ों का नुकसान

यूपीसीएल को जले मीटरों को बदलने, दोषपूर्ण मीटरों को बदलने, मीटरों का परीक्ष्ज्ञण करने और सेवाओं का रूपांतरण करने में भी लेटलतीफी भारी पड़ी। मई 2019 से अगस्त 2019 तक जले मीटरों से संबंधित 9,131 शिकायतें मिली, जिनमें से 8508 शिकायतों के निराकण में यूपीसीएल ने एक दिन से लेकर 1058 दिनों तक का विलंब किया।

इस लेटलतीफी की वजह से निगम को दो करोड़ छह लाख का जुर्माना भरना पड़ा। इसी प्रकार मई 2019 से अगस्त में यह पाया गया कि मीटरों का परीक्षण करने की 11443 शिकायतें प्राप्त हुई, जिनमें से 5,142 शिकायतों का निपटारा एक से 1156 दिन विलंब से किया गया। इसके चलते निगम को 66 लाख 34 हजार रुपये का जुर्माना भरना पड़ा।

दोषपूर्ण मीटर बदलने के मामले में भी निगम के पास 45761 शिकायतें आईं, जिनमें से 13698 शिकायतों को निगम ने एक से 1203 दिनों के विलंब से निपटाया, जिसके चलते निगम को चार करोड़ 83 लाख रुपये का अर्थदंड भरना पड़ा।

संपत्ति का स्वामित्व बदलने पर उपभोक्ता का नाम बदलने की सेवा के मामले में भी 8972 में से 712 प्रकरणों में समय से कार्रवाई नहीं हुई, जिस वजह से निगम को 23 लाख 78 हजार रुपये का जुर्माना भरना पड़ा।

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कनेक्शन काटने में देरी पर निगम ने भरा तीन करोड़ जुर्माना

उपभोक्ताओं की ओर से 18 हजार 36 आवेदन बिजली कनेक्शन कटवाने के लिए आए। इनमें से नौ हजार 474 मामलों में यूपीसीएल ने कनेक्शन काटने में एक से 1444 दिन का समय लगा दिया। इस देरी की वजह से यूपीसीएल को तीन करोड़ 19 लाख रुपये का जुर्माना भरना पड़ा।

इसी प्रकार, फ्यूज उड़ने या एमसीबी ट्रिप होने के मामलों में भी निराकरण में देरी की वजह से यूपीसीएल पर 14 हजार 860 रुपये का अर्थदंड लगा। सर्विस लाइन टूटने पर देरी के चलते यूपीसीएल को दस लाख 43 हजार रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।

वोल्टेज संबंधी समस्याओं के निराकरण में देरी की वजह से यूपीसीएल को एक लाख 30 हजार, वितरण लाइन में दोष के चलते 98 हजार 780 रुपये, एचटी मेंस विफल होने पर 11 हजार 58 रुपये का जुर्माना भरना पड़ा। 

मीटर और केबल की कमी से नहीं मिल पाई उपभोक्ताओं को सेवा

कैग की रिपोर्ट में यह तथ्य भी सामने आया है कि यूपीसीएल 2016-17 और 2017-18 के दौरान दो लाख 69 हजार 563 सिंगल फेज मीटर और 2016-17 से 2018-19 के दौरान 67 हजार 873 थ्री फेज मीटर की कमी को पूरा नहीं कर पाया। इसी प्रकार, 28 लाख 26 हजार 585 वर्ग मीटर केबल का भी अभाव रहा, जिस वजह से उपभोक्ताओं को सेवा समय पर नहीं मिल पाई।

35 प्रतिशत कर्मचारियों-अधिकारियों के भरोसे व्यवस्था

कैग की रिपोर्ट में यह तथ्य भी सामने आया कि यूपीसीएल के पास मानवशक्ति का भारी अभाव है। ईई, जेई, एई, टीजी प्रथम, टीजी द्वितीय और ड्राफ्टमैन के स्वीकृत 1143 पदों के सापेक्ष 411 व्यक्ति यानी 35.64 प्रतिशत ही 30 अक्तूबर 2019 को उपलब्ध थे। हालांकि प्रबंधन ने स्वीकार किय है कि चयन और पदों को भरने का प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है।

पिटकुल ने ठेकेदारों को दिया अनुचित लाभ

कैग की रिपोर्ट में सामने आया है कि पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड(पिटकुल) ने लेबर सेस की वसूली ही नहीं की। लिहाजा, इस वजह से ठेकेदारों को 17 लाख 95 हजार रुपये का अनुचित लाभ हुआ।

पिटकुल ने सब स्टेशन में बे के निर्माण में नियोजन की कमी के बाद तीन करोड़ सात लाख रुपये खर्च किया लेकिन यह सब बेकार था क्योंकि 30 में से छह बे का उपयोग सब स्टेशन के चालू होने के बाद से नहीं किया जा सका। वहीं पिटकुल ने एशियन विकास बैंक से जो ऋण लिया था, उसका समय से सदुपयोग न करने की वजह से दो करोड़ 28 लाख रुपये का प्रतिबद्धता शुल्क देना पड़ा।
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