प्रदेश की महिलाओं को पति की पैतृक संपत्ति में बराबरी का अधिकार देने के बाद अब त्रिवेंद्र मंत्रिमंडल ने महिलाओं के सिर से घास के बोझ को हटाने का फैसला लिया है। बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना को हरी झंडी दिखा दी गई। इस योजना के तहत राज्य के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में पशुपालन से जुड़ी महिलाओं और पुरुषों को रियायत (सब्सिडी) पर पैक्ड चारा घर-घर उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना का सबसे बड़ा फायदा पहाड़ की उन महिलाओं को होगा, जिन्हें घास के लिए दुर्गम पहाड़ों और घने जंगलों में जाना पड़ता है। विधानसभा सत्र घोषित होने की वजह से मंत्रिमडंल की बैठक की ब्रीफिंग नहीं की गई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बैठक में सात अहम प्रस्तावों को चर्चा के बाद मंजूरी दे दी गई।
पहाड़ में चार और मैदान में दो रुपये सब्सिडी
मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना सहकारिता विभाग की राज्य समेकित सहकार विकास परियोजना (एनसीडीसी) के माध्यम से संचालित होगी। इस योजना के तहत सहकारी संघ के माध्यम से चारा खरीदने पर पशुपालकों को 50 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। पहाड़ में चारे पर प्रति किग्रा चार रुपये और मैदानी क्षेत्रों में प्रति किग्रा दो रुपये सब्सिडी प्रस्तावित है। इस योजना के लिए 2021-22 के बजट में 16 करोड़ 78 लाख 25000 रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें 10 करोड़ 25 लाख रुपये सब्सिडी के लिए होंगे। इस योजना से मक्का की खेती कर रहे किसानों की आय बढ़ेगी।
तीन लाख महिलाओं के कंधे का बोझ होगा कम
घसियारी कल्याण योजना से प्रदेश के पर्वतीय ग्रामीण इलाकों की करीब तीन लाख महिलाओं के कंधे का बोझ कम होगा। इस योजना के तहत उन्हें उनके गांव में ही पैक्ड सायलेज (सुरक्षित हरा चारा) और संपूर्ण मिश्रित पशुआहार (टीएमआर) उपलब्ध होगा। सरकार एक ओर जहां मक्के की खेती कराने में सहयोग देगी तो दूसरी ओर उनकी फसलों का क्रय भी करेगी।
राज्य सरकार के मुताबिक, प्रदेश के पर्वतीय गांवों में करीब तीन लाख महिलाएं रोज अपने कंधों पर घास का बोझ ढ़ो रही हैं। वह चारा या घर में इस्तेमाल होने वाली ज्वलनशील लकड़ी के लिए रोजाना आठ से दस घंटे तक का समय देती हैं। इस वजह से उनके कंधों में दर्द, कमर दर्द, गर्दन दर्द, घुटनों की समस्या आम है। उन्हें अगर आसानी से घास मिलेगा तो हर महीने करीब 300 घंटे की बचत होगी। इसके साथ ही गांव में रहकर ही उनकी आमदनी बढ़ेगी। प्रदेश में पर्वतीय क्षेत्रों में चारे की कमी के बीच महिलाओं के कंधे पर चारा लाने की बड़ी जिम्मेदारी है। इससे उन्हें मुक्त करने के लिए ही मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना लाई गई है।
योजना के तहत प्रदेश के दो हजार किसान परिवारों की दो हजार एकड़ भूमि पर मक्का की सामूहिक सहकारी खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। चूंकि मक्के की फसल 90 से 120 दिन में तैैयर हो जाती है, लिहाजा किसान इसके बाद तिलहन, मटर और सब्जियों की खेती कर लाभ कमा सकेंगे। खास बात यह है कि सायलेज और टीएमआर का संतुलित आहार देने से दूध में वसा की मात्रा एक से डेढ़ प्रतिशत बढ़ने के साथ ही दूध उत्पादन भी 15 से 20 प्रतिशत बढ़ सकता है। इससे भी पशुपालकों की आय में इजाफा होगा।
सरकार फसल उगवाएगी और खरीदेगी
इस योजना के तहत सरकार एम्स पैक्स के माध्यम से किसानों को कृषि उपकरण, कृषि ऋण सुविधा, बीज, उर्वरक आदि की व्यवस्था कराए जाने के साथ ही उनकी उपज का आवश्यक रूप से क्रय भी करेगी। योजना के तहत मक्के की संयुक्त सहकारी खेती सायलेज, टीएमआर एवं पशुचारा उत्पादन इकाई की स्थापना और पशुपालकों को उपलबध कराने के लिए उत्पाद वितरण प्रणाली की व्यवस्था सहकारिता विभाग की ओर से कराई जाएगी। इसके लिए 670 बहुद्देशीय सहकारी समितियां, 1000 से अधिक राशन की दुकानें, यूएलडीबी, यूसीडीएफ, पशुपालन विभाग के चारा बैंक और अन्य पूर्व स्थापित सरकारी विपणन केंद्रों का इस्तेमाल किया जा सकेगा।