बामनाथ गदेरे पर वर्ष 2006 में गार्डर पुल का निर्माण हुआ था। तब गांवों के छात्र-छात्राएं इसी पुल से आवाजाही कर इंटर स्तर की पढ़ाई के लिए जीआईसी नैल-ऐंथा और सांकरी पहुंचते थे, लेकिन वर्ष 2018 में बरसात के दौरान गदेरे में बाढ़ आने से पुल क्षतिग्रस्त हो गया।
पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से अभी भी गदेरे में पड़े हुए हैं। इसके बाद ग्रामीणों के समक्ष आवाजाही का संकट खड़ा हो गया है। लोक निर्माण विभाग ने भी पुल का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा, लेकिन आज तक विभाग का प्रस्ताव शासन में धूल फांक रहा है।
ग्रामीणों की परेशानी का आलम यह है कि पुल न होने से ग्रामीण अपने घरों से बाहर नहीं जा पा रहे हैं। मनोज भंडारी और बृजमोहन चमोला का कहना है कि गदेरे पर पुल की आवश्यकता है। पुल न होने से ग्रामीण मीलों दूरी अतिरिक्त तय कर रहे हैं।
लोनिवि के ईई राजकुमार का कहना है कि नौ अगस्त 2019 को पोखरी के बामनाथ गदेरे पर पैदल झूला पुल बह गया था। लोनिवि ने 54 मीटर लंबे स्पान के झूला पुल का स्टीमेट बनाकर 2 करोड़ 20 लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा है, लेकिन अभी तक पुल के लिए बजट प्राप्त नहीं हुआ है। जैसे ही बजट प्राप्त हो जाएगा, पुल का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।