यह देखना भी दिलचस्प होगा कि चुनावी कुरुक्षेत्र में पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत, विजय बहुगुणा, सतपाल महाराज, डॉ. हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल के युवा मुख्यमंत्री के समीकरण कैसे रहते हैं।
सियासी पंडित मानते हैं कि विधानसभा चुनाव में युवा मुख्यमंत्री पर दांव लगाने से पार्टी को फायदा हो सकता है। राज्य में 57 प्रतिशत मतदाता युवा हैं जिनकी चुनाव में निर्णायक भूमिका है। लिहाजा पार्टी की नजर इन्हीं पर लगी है। मुख्यमंत्री धामी ने कैबिनेट की पहली ही बैठक में 22 हजार से ज्यादा खाली पदों को भरने का निर्णय लिया।
इसका सीधा अर्थ यह है कि भाजपा युवा वोटरों को साधने का लक्ष्य लेकर चल रही है जो फिलहाल बेरोजगारी के कारण खासे व्यथित हैं। हालांकि मुख्यमंत्री भी उनकी अपेक्षा और नाराजगी से वाकिफ हैं। वह कहते हैं कि सरकारी नौकरियां सीमित हैं, लेकिन हम लाखों की संख्या में स्वरोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं। सरकार का इस दिशा में प्रयास करेगी।