अभियोजन के तर्क और बचाव की दलीलों के आधार पर कोर्ट में केस डायरी का अवलोकन किया गया। अदालत ने माना कि इन दोनों का नाम एफआईआर में नहीं है। अभ्यर्थियों से आरोपियों ने कितने रुपये प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लिए, इसके भी कोई साक्ष्य नहीं हैं। प्रथमदृष्टया अपराध में संलिप्तता से इनकार करते हुए कोर्ट ने दोनों को जमानत दे दी।
क्या था मामला
वीपीडीओ भर्ती धांधली में जनवरी 2020 में विजिलेंस ने मुकदमा दर्ज किया था। लेकिन, अक्तूबर 2022 तक किसी भी आरोपी को नामजद नहीं किया था। भर्ती धांधलियों में एसटीएफ भी जांच कर रही थी। लिहाजा, यह जांच भी विजिलेंस से हटाकर एसटीएफ के सुपुर्द कर दी गई। इस मामले में एसटीएफ ने आठ अक्तूबर को उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पूर्व अध्यक्ष आरबीएस रावत, पूर्व सचिव एमएस कन्याल और पूर्व परीक्षा नियंत्रक आएस पोखरिया को गिरफ्तार किया था। इस मामले में एसटीएफ ने स्नातक स्तरीय परीक्षा के पेपर लीक मामले में पहले से जेल में बंद हाकम सिंह रावत और आरएमएस टेक्नो सॉल्यूशन के मालिक के भाई संजीव चौहान को भी आरोपी बनाया था।