उत्तराखंड समेत देश के तमाम हाथी बाहुल्य राज्यों में मानव- हाथी संघर्ष रोकने के लिए परंपरागत तरीकों के साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए वन्य जीव संस्थान के साथ ही कई अन्य संस्थानों के वैज्ञानिक ऐसे उपकरण विकसित करने में लगे हैं जिनसे एलीफैंट कॉरिडोर के आसपास गांवों में ग्रामीणों को हाथियों के मूवमेंट और उनकी तात्कालिक आक्रामकता के बारे में सचेत किया जा सके।
आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले तीन साल के भीतर देश के तमाम राज्यों में मानव- हाथी संघर्ष में जहां 300 हाथियों की मौत हो गई, वहीं 1401 लोग हाथियों के हमले में मारे गए। साल 2018-19 में जहां 115 पक्षियों की मौत हुई, वहीं 2019-20 में 99 और 2020-21 में 87 हाथियों की मौत हो चुकी है।
वन्यजीव विज्ञानियों की मानें तो देश के तमाम एलीफेंट रिजर्व व टाइगर रिजर्व में पर्याप्त चारे और पानी की कमी की वजह से हाथी आबादी की ओर रुख कर रहे हैं परिणामस्वरूप मानव- हाथी संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ रही है। हालांकि हाथियों को आबादी क्षेत्र में दाखिल होने से रोकने को लेकर एलीफैंट प्रूफ ट्रेंच, सोलर फेंसिंग, दीवारों के निर्माण के साथ ही कई परंपरागत तरीके अपनाए जा रहे हैं लेकिन इसके बावजूद मोनू हाथी संघर्ष के घटनाएं कम नहीं हो रही है जो चिंता का विषय है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरी दुनिया में वर्तमान समय में 60 हजार के करीब हाथी है। साल 2017 में कराई गई गणना के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में हाथियों की संख्या 30 हजार है। उत्तराखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल समेत देश के 22 राज्यों में हाथी पाए जाते हैं। जहां तक सबसे अधिक हाथियों वाले राज्य का सवाल है तो कर्नाटक में सबसे अधिक हाथी पाए जाते हैं।