अग्रिम चौकियों के साथ ही हर्षिल में सेना की छावनी के बाद अब चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे के पास सेना का बेस कैंप तैयार करने की सुगबुगाहट है। इसके लिए भारतीय सेना ने राज्य सरकार से बेस कैंप निर्माण के लिए करीब तीन हजार नाली जमीन उपलब्ध कराने को कहा है, जिस पर जिला प्रशासन ने भूमि तलाशने का काम शुरू कर दिया है।
भारतीय सेना के लिए सामरिक दृष्टि से खास मायने रखता है चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डा
जिला मुख्यालय से करीब 35 किमी दूर स्थित चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डा सेना के लिए सामरिक दृष्टि से खास मायने रखता है। चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे को एडवांस लैंडिंग ग्राउंड में तब्दील करने की कार्ययोजना भी प्रस्तावित है, जिसके लिए शासन को डेढ़ सौ एकड़ भूमि उपलब्ध करवाई जानी है।
बेस कैंप तैयार होने से सेना को सीमा पर आपात स्थिति के दौरान खासी मदद मिलेगी
अब इसी कड़ी में सेना के जवानों की जरूरतों के लिए रसद सामग्री और अन्य आवश्यक साजो-सामान के लिए बेस कैंप की भी जरूरत है, जिसके लिए सेना ने उत्तराखंड सरकार से गंगोत्री हाईवे पर चिन्यालीसौड़ से धरासू के बीच करीब तीन हजार नाली भूमि उपलब्ध कराने को कहा है। पूर्व सैन्य अधिकारियों की मानें, तो यहां बेस कैंप तैयार होने से सेना को सीमा पर आपात स्थिति के दौरान खासी मदद मिलेगी।
अस्थायी तौर पर कैंप कर चुकी है सेना
भारत-चीन सीमा पर चीन से तनातनी के बाद नेलांग, जाढ़ूंग, नीलापानी, नागा, थागला, मुनिंगला पास आदि अग्रिम चौकियों पर तैनात जवानों ने चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे और इसके आसपास भी ट्रांजिट कैंप किया था। उस दौरान दो माह तक इस क्षेत्र में सेना के वाहनों और जवानों की आवाजाही बनी रही थी।
सेना की ओर से बेस कैंप के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसके लिए जमीन तलाशी जा रही है।
-मयूर दीक्षित, डीएम उत्तरकाशी।