उत्तराखंड सचिवालय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास कल्याम समिति ने आरोप लगाया है कि सचिवालय में तैनात एससी व एसटी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कार्य आवंटन व तबादलों में उत्पीड़न किया जा रहा है। समिति ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अपर मुख्य सचिव सचिवालय प्रशासन को पत्र लिखकर कार्रवाई करने की मांग की है।
समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र पाल सिंह और महासचिव कमल कुमार ने पत्र के साथ साक्ष्य भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि स्थानांतरण की तीन साल की समय सीमा है। लेकिन एससी एसटी कार्मिकों के एक साल में तबादला किए जा रहे हैं। कार्य आवंटन, ट्रांसफर व प्रार्थना पत्रों पर नियमानुसार कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने मांग की कि इस मामले में अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए जाएं ताकि एससी एसटी वर्ग के कर्मचारियों के उत्पीड़न पर रोक लग सके।
केस एक : अपर सचिव रमेश कुमार
पत्र में कहा गया है कि अपर सचिव रमेश कुमार को विद्यालय शिक्षा भी आवंटित किया गया। लेकिन आवंटन के अनुसार, वरिष्ठता को नजरांदाज किया गया। उन्हें विभाग के पांच अनुभागों में से एक अनुभाग दिया गया। जबकि अधिकारी का 25 साल का अनुभव है। विभाग में दो अपर सचिव तैनात हैं, जिनके बीच अनुभागों का समान आवंटन होना चाहिए।
केस दो : वीरेंद्र पाल सिंह, संयुक्त सचिव
सिंह के पास पंचायती राज, संस्कृत शिक्षा व भाषा आवंटित किया गया। लेकिन नियमों के विपरीत जाकर उन्हें पंचायती विभाग से अलग कर दिया गया। जानबूझकर कनिष्ठ अधिकारियों को तरजीह दी गई।
केस तीन : ममता आर्य, समीक्षा अधिकारी
ममता ने 26 अगस्त को प्रार्थना पत्र ने उच्च शिक्षा में अनुभाग अधिकारी व उप सचिव पर मानसिक उत्पीड़न करने का प्रार्थना पत्र दिया। उच्चाधिकारियों ने न्यायपूर्ण कार्रवाई नहीं की। बगैर उचित कारण के उनका तबादला दूसरे अनुभाग में कर दिया।