शिशुपाल रावत ने बताया कि पहाड़ी उत्पादों की बड़े शहरों में भारी डिमांड है। वह इस समय हर हफ्ते करीब 200 किलो तक पहाड़ी उत्पाद ऑनलाइन बेच रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभी ज्यादा काश्तकारों तक पहुंच नहीं बनी है, जिस कारण वह मांग के अनुरूप उत्पाद एकत्रित नहीं कर पा रहे हैं।
होलसेल की डिमांड है, लेकिन अभी रिटेल में सामान बेच रहे हैं। वह ग्रामीण महिलाओं को नमक सहित अन्य सामग्री पीसने के लिए देते हैं। सिलबट्टे पर पीसने के बाद पैसे देकर उनसे वह नमक ले लेते हैं। यह काम कोटद्वार क्षेत्र में चल रहा है। यह नमक भी शहरों में बिक रहा है।
‘पहाड़ी मार्ट’ पोर्टल पर चल रहा काम
शिशुपाल इंडिया मार्ट की तर्ज पर ‘पहाड़ी मार्ट’ के नाम से भी एक पोर्टल बना रहे हैं। इससे उनको कोई लाभ नहीं होगा, लेकिन किसान अपना उत्पाद सीधे ग्राहक तक बेच सकेंगे। पोर्टल इसमें जरिया बनेगा।
15 से 20 हजार दे रहे वेतन
शिशुपाल के अनुसार उन्होंने करीब चार लाख रुपये के बजट से काम शुरू किया, जिसमें रिसर्च वर्क भी शामिल था। इसी से शुरू में तनख्वाह भी दी। अब सामान बेचकर वेतन सहित अन्य छोटे मोटे खर्चे निकल जाते हैं। ऑनलाइन सामान बेचकर प्रतिमाह लगभग 02 लाख की आमदमी हो रही है। इस काम में 15 युवक जुड़े हैं। उन्हें औसतन 10 से 15 हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है।