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Uttarakhand: राज्य गठन के बाद आयोग ने तीसरी बार नहीं बढ़ाई बिजली दरें, 2003 में जारी हुआ था पहला टैरिफ आदेश

Wed, 01 Apr 2026 07:28 AM IST
Renu Saklani आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

राज्य गठन के बाद आयोग ने तीसरी बार बिजली दरें नहीं बढ़ाई। इससे पूर्व वर्ष 2006-07 व 2014-15 में आयोग ने शून्य टैरिफ दिया था। 2003 में पहला टैरिफ आदेश जारी हुआ था।

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बिजली - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राज्य गठन के बाद तीसरी बार ऐसा हुआ है जब उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने बिजली दरों में कोई भी बढ़ोतरी नहीं की। इससे पहले आयोग वर्ष 2006-07 और 2014-15 में बिजली दरों में शून्य बढ़ोतरी की थी।राज्य गठन होने के बाद नियामक आयोग ने पहला टैरिफ ऑर्डर वर्ष 2003 में जारी किया था।

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उस वक्त आयोग ने आम घरेलू उपभोक्ताओं के लिए कोई फिक्स चार्ज नहीं रखा था। खपत के हिसाब से बिजली दरें 1.80 से 2.50 रुपये प्रति यूनिट तक रखीं थीं। कॉमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए दरें तीन से साढ़े तीन रुपये, सरचार्ज समेत कई श्रेणियों में दरें घटाते हुए टैरिफ आदेश जारी हुआ था।

इसके बाद हर साल कुछ बढ़ोतरी होती रही। वर्ष 2006-07 में आयोग ने शून्य टैरिफ बढ़ोतरी की थी। इसके बाद वर्ष 2014-15 और अब 2026-27 के लिए आयोग ने शून्य बढ़ोतरी का आदेश जारी किया है। वहीं, वर्ष 2009-10 में बिजली दरों में सर्वाधिक 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी।

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16 साल में कब कितनी बढ़ोतरी

वर्ष प्रतिशत बढ़ोतरी
2010 10 17
2012 11 10
2013 14- 05
2014 15 00
2015 16 7.30
2016 17 5.10
2017 18 5.80
2018 19 2.60
2019 20 3.50
2020 21 4.50
2021 22 4.30
2022 23 2.68
2023 24 9.64
2024 25 6.92
2025 26 5.62
2026 27 00

पहले टैरिफ आदेश के समय 2801 गांवों में नहीं थी बिजली
आयोग ने वर्ष 2003 में जो पहला टैरिफ आदेश जारी किया था, उस वक्त 2801 गांव बिना बिजली के थे। केवल 30 प्रतिशत घरों में ही बिजली का कनेक्शन था। यूपीसीएल के प्रस्ताव में आयोग ने स्पष्ट किया गया था कि इन गांवों तक बिजली पहुंचानी है।

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आयोग ने 2004-05 के अंत तक 100 प्रतिशत मीटरिंग का लक्ष्य रखा था। उस समय 7,48,750 घरेलू, 89,605 व्यावसायिक, 8140 औद्योगिक, 17,324 कृषि और 1372 स्ट्रीट लाइट व अन्य उपभोक्ता थे। इनमें से 7,65,569 उपभोक्ताओं के पास ही मीटर लगे थे, बाकी 99,622 बिना मीटर वाले थे। आज कुल बिजली उपभोक्ताओं का आंकड़ा 29 लाख पार हो चुका है।

 

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