16 साल में कब कितनी बढ़ोतरी
| वर्ष |
प्रतिशत |
बढ़ोतरी |
| 2010 |
10 |
17 |
| 2012 |
11 |
10 |
| 2013 |
14- |
05 |
| 2014 |
15 |
00 |
| 2015 |
16 |
7.30 |
| 2016 |
17 |
5.10 |
| 2017 |
18 |
5.80 |
| 2018 |
19 |
2.60 |
| 2019 |
20 |
3.50 |
| 2020 |
21 |
4.50 |
| 2021 |
22 |
4.30 |
| 2022 |
23 |
2.68 |
| 2023 |
24 |
9.64 |
| 2024 |
25 |
6.92 |
| 2025 |
26 |
5.62 |
| 2026 |
27 |
00 |
पहले टैरिफ आदेश के समय 2801 गांवों में नहीं थी बिजली
आयोग ने वर्ष 2003 में जो पहला टैरिफ आदेश जारी किया था, उस वक्त 2801 गांव बिना बिजली के थे। केवल 30 प्रतिशत घरों में ही बिजली का कनेक्शन था। यूपीसीएल के प्रस्ताव में आयोग ने स्पष्ट किया गया था कि इन गांवों तक बिजली पहुंचानी है।
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आयोग ने 2004-05 के अंत तक 100 प्रतिशत मीटरिंग का लक्ष्य रखा था। उस समय 7,48,750 घरेलू, 89,605 व्यावसायिक, 8140 औद्योगिक, 17,324 कृषि और 1372 स्ट्रीट लाइट व अन्य उपभोक्ता थे। इनमें से 7,65,569 उपभोक्ताओं के पास ही मीटर लगे थे, बाकी 99,622 बिना मीटर वाले थे। आज कुल बिजली उपभोक्ताओं का आंकड़ा 29 लाख पार हो चुका है।