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उत्तराखंड : सरकारी तंत्र की सुस्त चाल में उलझकर 125933 कर्मचारियों के गोल्डन कार्ड फंसे

Tue, 17 Nov 2020 10:20 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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आयुष्मान भारत - फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश सरकार के 125933 कर्मचारियों के अटल आयुष्मान गोल्डन कार्ड अपने ही सरकारी तंत्र की सुस्त चाल में उलझकर रह गए हैं। सुस्ती का आलम यह है कि तमाम दिशा-निर्देशों और सूचनाओं के बावजूद 73933 कर्मचारियों ने योजना का लाभ लेने के लिए आईएफएमएस पोर्टल पर आनलाइन पंजीकरण नहीं कराया है।

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165722 कर्मचारियों में से जिन 91843 कर्मचारियों ने एंट्री की है, उनमें से भी केवल 39789 कर्मचारियों के डाटा का संबंधित विभागीय डीडीओ सत्यापन के लिए समय निकाल पाए हैं। अब भी 52 हजार से अधिक कर्मचारियों को डीडीओ की हरी झंडी का इंतजार है।

सत्यापन में हो रही देरी की वजह विभागों की हीलाहवाली के साथ आहरण वितरण अधिकारियों (डीडीओ) की सुस्त कार्यप्रणाली को माना जा रहा है। नतीजा यह है कि हजारों कर्मचारियों को अपने ही तंत्र के जाल से जूझना पड़ रहा है। लंबे समय से वे अटल आयुष्मान गोल्डन कार्ड की राह देख रहे हैं लेकिन कार्ड को हासिल करने के लिए उनके आवेदन (डाटा एंट्री) सरकारी सिस्टम की सुस्त चाल में उलझकर रह गए हैं। 
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स्वास्थ्य विभाग का ही रिकार्ड गड़बड़

स्वास्थ्य विभाग का ही रिकार्ड गड़बड़ है। इसी विभाग पर आयुष्मान योजना को कामयाब बनाने का जिम्मा है, लेकिन विभाग के 9715 कर्मचारियों में से अभी तक 3606 कर्मचारी पोर्टल पर एंट्री कर पाए हैं, और इनमें से भी केवल 814 को ही डीडीओ ने मंजूरी दी है। 

आठ विभागों का सत्यापन का रिकार्ड जीरो

प्रदेश सरकार के आठ ऐसे विभाग हैं जिनके कर्मचारियों के डाटा का सत्यापन का रिकार्ड शून्य है। इनमें लोक सेवा आयोग, कंट्रोलर लीगल मेट्रोलॉजी, निदेशक सतर्कता, फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, निदेशक स्थानीय निकाय, निदेशक ईएसआई।
 

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1388 सचिवालय कर्मियों में से तीन का सत्यापन

उत्तराखंड सचिवालय के 1388 कर्मचारियों में 421 ने आईएफएमएस पोर्टल पर आवेदन किया। इनमें से डीडीओ स्तर से केवल तीन का ही सत्यापन हो सका है।

बड़े विभागों में भी प्रगति निराशाजनक

अधिक कर्मचारी संख्या वाले बड़े विभागों में भी गोल्डन कार्ड बनाने की प्रक्रिया सुस्त सिस्टम की भेंट चढ़ गई है। पुलिस विभाग में 24336 कर्मचारियों में से 9887 की पोर्टल पर एंट्री है, इनमें से केवल 1905 को डीडीओ की मंजूरी मिली है।

माध्यमिक शिक्षा में 42888 कर्मचारियों में से 29296 ही पोर्टल पर एंट्री कर पाए हैं, इनमें से 15015 कर्मचारियों का ही सत्यापन हो सका है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग में 30872 कर्मचारियों में से 20933 ने पोर्टल में एंट्री की है। इनमें से केवल 8097 कर्मचारियों के डाटा का सत्यापन हो सका है। इसी तरह लोनिवि में 8426 कर्मचारियों में से 2477 की एंट्री हुई है और इसमें 890 का डाटा सत्यापित हुआ है। 

आंकड़ों में सुस्त चाल की तस्वीर

165722 कर्मचारियों को आयुष्मान कार्ड बनाए जाने हैं
91843 कर्मचारियों की आईएफएमस पोर्टल पर एंट्री हुई
39789 कर्मचारियों की डीडीओ स्तर पर मंजूरी हो चुकी है
125933 कर्मचारियों का गोल्डन कार्ड अभी अधर में हैं
73,879 कर्मचारियों को पोर्टल पर अभी जानकारी दर्ज करनी है
23 फीसदी ही कर्मचारियों के गोल्डन कार्ड की राह खुल पाई है

गोल्डन कार्ड की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए शासन स्तर से लगातार निर्देश जारी हो रहे हैं। कर्मचारियों ने पोर्टल पर जो डाटा दर्ज किया है, उसका सत्यापन संबंधित विभागों के डीडीओ ही कर सकते हैं, क्योंकि उनके पास कर्मचारियों की सर्विस बुक होती है, उसमें उनके परिवार के सदस्यों का ब्योरा होता है। 
- अरुणेंद्र सिंह चौहान, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण

जो डीडीओ सत्यापन करने में हीलाहवाली कर रहे हैं, उनके खिलाफ शासन को कार्रवाई करनी चाहिए। परिषद से वादा किया गया था कि अक्तूबर महीने से सभी कर्मचारियों को गोल्डन कार्ड मिल जाएगा। इसमें देरी से कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। 
- अरुण पांडेय, प्रदेश कार्यकारी महामंत्री, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद

हम सरकार से आयुष्मान कार्ड को लेकर लगातार मांग कर रहे हैं, लेकिन इसमें सुस्ती बरती जा रही है। यह चिंता का विषय है कि सचिवालय के करीब 1300 कर्मचारियों में से जिन 421 कर्मचारियों ने डाटा एंट्री की है, उनमें से केवल तीन का ही सत्यापन हो पाया। 
- राकेश जोशी, महासचिव, उत्तराखंड सचिवालय संघ
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