प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र में अगले चार साल में चार लाख कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होगी। एसोचैम और थॉट ऑर्बिट्रेज रिसर्च इंस्टीट्यूट (टारी) के संयुक्त सर्वे में यह बात सामने आई है। एसोचैम ने प्रदेश के उद्योगों में कुशल श्रमिकों की कमी बताई है। इसके तहत सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को सर्वे रिपोर्ट सौंपी गई है और उन्हें सुझाव दिया गया है कि इस कमी को दूर करने के लिए प्रदेश में कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएं।
द एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) के अध्यक्ष संदीप जजोदिया, महासचिव डीएस रावत और टारी की निदेशक क्षमा वी कौशिक ने बुधवार को सुभाष रोड स्थित होटल में पत्रकार वार्ता में राज्य सरकार के लिए तैयार अध्ययन रिपोर्ट को संयुक्त रूप से जारी किया। सीएम को भी यह अध्ययन रिपोर्ट सौंपी गई।
इसमें कहा गया है कि वर्ष 2017 से 2022 के दौरान उत्तराखंड में रोजगार के करीब 20 लाख छह हजार अवसर पैदा होंगे। वहीं, श्रमशक्ति में 25 लाख 30 हजार लोग और जुड़ेंगे। कार्ययोजना में कहा गया है कि कुशल श्रमशक्ति तैयार करने के लिए कृषि प्रबंधन और वर्षा जल संचयन जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में युवाओं को विस्तृत प्रशिक्षण दिए जाने की आवश्यकता है।
रिपोर्ट में विभिन्न स्थानों पर क्षमता विकास केंद्र स्थापित किए जाने पर जोर देते हुए कहा गया है कि ऋषिकेश में खाद्य प्रसंस्करण, अल्मोड़ा में हथकरघा और उत्तरकाशी में पर्यटन के क्षेत्र में क्षमता विकास केंद्र बनाए जाने की जरूरत है। रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के अध्ययन सुझावों के अनुरूप विभिन्न जिलों में तमाम स्तरों पर कुशल कामगारों की आवश्यकता की पूर्ति के लिए मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (एमआईएस) तैयार किया जाना चाहिए