वहीं चमोली जनपद के तीन ब्लॉक जोशीमठ, दशोली और घाट के लगभग 500 गावों में कई घंटे से विद्युत सप्लाई ठप है। यहां 66 केवी की श्रीनगर-कोठियालसेंण विद्युत लाइन में फॉल्ट आने से बिजली बाधित है। बता दें कि शुक्रवार को देर शाम साढ़े 7 बजे बिजली बाधित हुई थी जो अभी तक नहीं आईं है।
चमोली जिले में 48 सड़कें भूस्खलन से बंद
जिले में बारिश के कारण हो रहे भूस्खलन और भू-धंसाव से 48 संपर्क मार्ग बंद पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों को लंबी दूरी पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है।
सड़कों की सबसे बुरी स्थिति पोखरी ब्लॉक की बनी हैं। यहां 11 सड़कें जगह-जगह भूस्खलन होने से बंद हैं। रौता, जौरासी, हापला घाटी, कर्णप्रयाग, ताली, कंसारी जैसे क्षेत्रों को यातायात से जोड़ने वाली सड़कें बंद पड़ी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कनकचौंरी-रौता सड़क जून माह के शुरुआत से ही बंद पड़ी हैं, जिससे ग्रामीण दो माह से लगभग 10 किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर रहे हैं।
इधर, बदरीनाथ हाईवे भी जगह-जगह खस्ता हालत में पहुंच गया है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी का कहना है कि सड़कों को खोलने के बाद रात को हो रही बारिश से फिर सड़कों पर भूस्खलन हो रहा है। मौसम सामान्य होने के बाद सड़कों की दशा सुधार ली जाएगी।
मसूरी में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। शहर में करीब दो घंटे तक मूसलाधार बारिश हुई, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई। बारिश से कई जगह सड़क पर भारी मलबा और पत्थर आने से यातायात प्रभावित हुआ। गलोगी धार के पास एक बार फिर बोल्डर और मलबा आने से मसूरी-देहरादून मार्ग आधे घंटे से अधिक समय तक बंद रहा।
गंगोत्री हाईवे बंद
चिन्यालीसौड़ के नजदीक नगुन गांव के समीप गंगोत्री हाईवे दोपहर 12:00 बजे से बंद है। यहां लगातार बोल्डर गिर रहे हैं। मार्ग खोलने के लिए जेसीबी लगाई गई है। हाईवे के दोनों ओर बड़ी संख्या में यात्री फंसे हुए हैं। वहीं स्यूसा पुल वाला मोटर मार्ग भी बंद होने के कारण उत्तरकाशी जाने के लिए लोगों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।
भारी बारिश और भूस्खलन से दो गोशाला क्षतिग्रस्त, 45 बकरियों के दबकर मरने की सूचना
राजधानी देहरादून में फिलहाल मौसम साफ बना हुआ है। हालांकि शनिवार को तड़के देहरादून में बारिश का दौर जारी था, लेकिन उसके बाद चटख धूप खिल आई। इसके बाद फिर दोपहर 12 बजे हल्की बारिश हुई। वहीं राज्य के पौड़ी जिले के नौगांव में शुक्रवार देर रात भारी बारिश और भूस्खलन से दो गोशाला क्षतिग्रस्त हो गईं हैं। जिसमें 45 बकरियों के दबकर मरने की सूचना है।