चमोली जिले में बारिश के कारण हो रहे भूस्खलन और भू-धंसाव से 48 संपर्क मार्ग बंद पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों को लंबी दूरी पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है। सड़कों की सबसे बुरी स्थिति पोखरी ब्लाक की बनी हैं। यहां 11 सड़कें जगह-जगह भूस्खलन होने से बंद हैं। रौता, जौरासी, हापला घाटी, कर्णप्रयाग, ताली, कंसारी जैसे क्षेत्रों को यातायात से जोड़ने वाली सड़कें बंद पड़ी हैं।
बीरबल सिंह का कहना है कि कनकचौंरी-रौता सड़क जून माह के शुरुआत से ही बंद पड़ी हैं, जिससे ग्रामीण दो माह से लगभग 10 किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर रहे हैं। इधर, बदरीनाथ हाईवे भी जगह-जगह खस्ता हालत में पहुंच गया है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी का कहना है कि सड़कों को खोलने के बाद रात को हो रही बारिश से फिर सड़कों पर भूस्खलन हो रहा है। मौसम सामान्य होने के बाद सड़कों की दशा सुधार ली जाएगी।
मलबा आने से बंद परखाल-चोपता-भटियाणा सड़क बंद
नारायणबगड़ क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण परखाल-चोपता-भटियाणा मार्ग मलबा आने से जाख-चलियापाणी के पास बंद हो गया है। ऐसे में करीब 20 गांवों के लोगों को पैदल चलकर बाजार जाना पड़ रहा है। वहीं, बगोली-चूला-गबिनी और नारायणबगड़-चोपता मार्ग भी बीते बृहस्पतिवार से यातायात के लिए ठप है। जयबीर, रमेश व महेश ने कहा कि क्षेत्र में सड़कें बनाने के लिए पहाड़ों को बेतरतीब तरीके से काटा जा रहा है, जिससे बारिश में पहाड़ी दरककर सड़कों पर गिर रही है।
ऐसे में सड़कें बंद हो रही हैं और उसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान डॉ. भूपेंद्र मेहरा, ब्रह्मानंद सती ने बताया कि बृहस्पतिवार देर शाम को जाख और चलियापाणी के समीप पहाड़ी से मलबा आने से सड़क बंद हो गई है और सड़क के नीचे लोगों की कृषि भूमि भी मलबे की चपेट में आ गई है। वहीं पीएमजीएसवाई के ईई प्रमोद गगाड़ी ने कहा कि जल्द सड़क को खोल दिया जाएगा।