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उत्तराखंड: किसानों तक नहीं पहुंच पाई महक क्रांति नीति की खुशबू, एक साल बाद भी नहीं बनीं नियमावली

Sat, 29 Aug 2026 05:53 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

सगंध खेती को नई उड़ान देने के इरादे से लाई गई महक क्रांति नीति अभी कागजों से आगे नहीं बढ़ पाई है। नीति को मंजूरी मिले एक साल होने को है, लेकिन नियमावली के अभाव में एरोमा खेती का सपना देख रहे किसान आवेदन तक नहीं कर पा रहे हैं।
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बैठक (फाइल फोटो) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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उत्तराखंड में सगंध खेती (एरोमा) को बढ़ावा देने के लिए एक साल पहले मंजूर महक क्रांति नीति की खुशबू किसानों तक नहीं पहुंच पाई है। नीति के लिए नियमावली नहीं बनने से किसानों को लाभ नहीं मिल रहा है। प्रदेश सरकार ने सितंबर 2025 में उत्तराखंड की पहली महक क्रांति नीति को मंजूरी दी थी। जो आगामी 10 साल के लिए लागू होगी।

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पहले चरण में 22750 हेक्टेयर क्षेत्र में 91 हजार किसानों को सगंध खेती से जोड़ना है। सरकार की ओर से नीति में एरोमा पौधों पर सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया है। एक हेक्टेयर तक लगाने वालों को 80 प्रतिशत और इससे अधिक जमीन पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी।

नीति के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों में औषधीय एवं सुगंधित पौधों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष वैली विकसित की जाएंगी। जिनमें चमोली एवं अल्मोड़ा में डेमस्क गुलाब वैली (2000 हेक्टेयर), चंपावत एवं नैनीताल में तेजपात (5200 हेक्टेयर), पिथौरागढ़ में तिमूर वैली (5150 हेक्टेयर), हरिद्वार व पौड़ी में लैमनग्रास वैली (2400 हेक्टेयर), ऊधमसिंह नगर व हरिद्वार में मिंट वैली (8000 हेक्टेयर) शामिल है।

नीति में नर्सरी तैयार करने, खेती के लिए अनुदान, प्रशिक्षण एवं क्षमता-विकास, फसल बीमा और पैकेजिंग और ब्रांडिंग जैसी आवश्यकताओं की व्यवस्था की है। लेकिन एक साल बाद भी नीति की नियमावली नहीं बनीं है। हालांकि परफ्यूमरी एवं सगंध अनुसंधान संस्थान सेलाकुई ने नर्सरी तैयार करनी शुरू कर दी है।

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महक क्रांति नीति के लिए नियमावली बनाने की प्रक्रिया चल रही है। नीति का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार किया जाएगा। इसमें आवेदन, अनुदान भुगतान को ऑनलाइन होगा। -नृपेंद्र चौहान, निदेशक, परफ्यूमरी एवं सगंध अनुसंधान संस्थान सेलाकुई

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