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एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: मदरसों को लेकर सरकार का सख्त रुख, खजान दास का बड़ा बयान, इन मुद्दों पर भी बोले

Wed, 02 Sep 2026 12:23 PM IST
Renu Saklani बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला, देहरादून

सार

उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता को लेकर सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया है।
कैबिनेट मंत्री खजान दास ने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बताया कि मान्यता नहीं लेने वाले मदरसों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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कैबिनेट मंत्री  खजान दास - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश में मदरसों के मान्यता न लेने पर सरकार सख्त रुख अपनाने हुए अब कानूनी कार्रवाई करने जा रही है। धामी सरकार ने मदरसा बोर्ड को भंग कर पहली बार उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है। अब प्रदेश में संचालित मदरसों को राज्य शिक्षा बोर्ड के माध्यम से पाठ्यक्रम पढ़ाने के लिए प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी।

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जो मदरसे मान्यता नहीं ले रहे हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी है। समाज कल्याण मंत्री खजानदास ने अमर उजाला के वरिष्ठ संवाददाता बिशन सिंह बोरा से बातचीत में मदरसों की मान्यता, अल्पसंख्यक व समाज के अन्य वर्गों के लिए सरकार की योजनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि राज्य में विधवा पेंशन में वृद्धि के साथ ही इसका नाम बदलकर एकल नारी सम्मान किया जाएगा।

सवाल : मंत्रिमंडल में ऐसे समय में जगह मिली जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, ऐसे जनता में छाप छोड़ने के लिए आपकी क्या प्राथमिकताएं होंगी।

जवाब : सही बात है कम समय है और काम ज्यादा है, इसी साल मार्च में समाज कल्याण विभाग की जिम्मेदारी मिली, मुख्यमंत्री ने काम करने का मौका दिया है। हमारे सामने जो काम है, उसे पूरा करने की चुनौती है, पेंशनधारकों को पहले पेंशन मिलने में देरी होती थी, लेकिन अब एक क्लिक में सभी पेंशनधारकों के खातों में समय पर पेंशन जा रही है। सरकार नौ लाख 87 हजार लोगों को सात तारीख से पहले पेंशन दे रही है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।

सवाल: हल्द्वानी में शुद्धिकरण को लेकर कांग्रेस हमलावर है, जो इसे दलित समाज और खरगे का अपमान बता रही है, आप वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री होने के साथ ही उत्तराखंड में भाजपा का बड़ा दलित चेहरा भी हैं, इसे किस रूप में देखते हैं।

जवाब: खरगे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। जाति का जहां तक सवाल है, राज्य के लोगों के साथ ही मुझे यह मालूम नहीं था कि वह किस जाति से हैं, भाजपा इस पूरे मामले से खुद को अलग करती है। पार्टी का इससे कोई लेना देना नहीं है। उत्तराखंड देवभूमि है, हल्द्वानी रामलीला मैदान स्थिति सभास्थल में एक संस्था के माध्यम से पूजापाठ किया गया, इसमें दलित लोग भी शामिल थे।

इससे पहले इस मैदान में भाजपा और कांग्रेस की कई रैलियां हुईं। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य कांग्रेस का दलित चेहरा हैं, जो विधानसभा के अध्यक्ष रहे हैं, यहां हुई रैलियां में शामिल रहे लेकिन कभी ऐसी कोई बात नहीं हुई। कांग्रेस इस मामले को भुनाना चाह रही है। जो कांग्रेस का चुनाव के लिए अपनाया गया हथकंडा है। जनता सब जानती है। वोट के लिए अनुसूचित जाति के समाज का इस्तेमाल किया गया।

सवाल: शुद्धिकरण मामले में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ केस किया गया है। अब कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।

जवाब: नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सबसे पहले यह धमकी दी कि हल्द्वानी में हवन करने वालों के खिलाफ वह प्राथमिकी दर्ज कराएंगे। ऐसे में उन लोगों ने राहुल गांधी के खिलाफ अपनी रिपोर्ट दर्ज करवा दी।

सवाल: सरकार ने मदरसों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए मदरसा बोर्ड खत्म कर राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया, लेकिन अधिकतर मदरसों ने अब तक शिक्षा विभाग से मान्यता नहीं ली।

जवाब: सरकार मदरसों के बच्चों की धार्मिक शिक्षा के विरोध में नहीं हैं। सीएम का सख्त आदेश है कि मदरसों को एक परिधि में लाया जाएगा। इसके बाद भी 452 मदरसों में से 200 से अधिक मदरसों ने मान्यता से इनकार कर दिया।

सवाल: सरकार की ओर से समय-समय पर मदरसों की जांच के आदेश होते हैं लेकिन जांच पूरी नहीं होती। पूर्व में हुए जांच के आदेश पर हरिद्वार को छोड़कर किसी अन्य जिले ने अपनी रिपोर्ट नहीं दी। ऐसे में आरोप लगता है कि यह चुनावी एजेंडा है, चुनाव नजदीक आते ही सरकार को मदरसों की याद आती है।

जवाब: ऐसा नहीं है, पहले से मदरसों की जांच होती रही है। मंत्री होने के नाते मेरा कहना है अल्पसंख्यक में केवल मुस्लिम नहीं बल्कि सिख, ईसाई, बौध आदि धर्मों के लोग भी आते हैं। इन सभी के लिए प्राधिकरण का गठन किया गया है।

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सवाल: पूर्व समाज कल्याण मंत्री ने सहायक समाज कल्याण अधिकारियों को कंप्यूटर ऑपरेटर दिए जाने की घोषणा की थी, इस दिशा में क्या हुआ।

जवाब: पूर्व मंत्री की ओर से किए गए कार्यों को आगे बढ़ाते हुए इस पर अमल किया जाएगा।

सवाल: पेंशन के लिए आय के मानक को बढ़ाने की मांग की जा रही है। ताकि अधिकतर लोगों को इसका लाभ मिले।

जवाब: सरकार की ओर से वार्षिक आय के मानक को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। जल्द ही इस पर कोई निर्णय लिया जाएगा।

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सवाल: विधवा, दिव्यांग, तीलू रौतेली, बौना पेंशन बढ़ाने की मांग पिछले काफी समय से की जा रही है। क्या सरकार इस पर कोई निर्णय लेगी।

जवाब: समाज कल्याण विभाग की ओर से विभिन्न आठ तरह की पेंशन दी जा रही हैं। पेंशन में वृद्धि पर विचार किया जा रहा हैं। इसके लिए प्रस्ताव भेजा गया है। सीएम की मुहर लगते ही पेंशन में बढ़ोतरी होगी।

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